🐅 चैत्र नवरात्रि : तृतीया: माँ चंद्रघंटा [शनिवार, 21 मार्च 2026]
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या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ॥
यह देवी पार्वती का विवाहित रूप है। माता अपने माथे पर अर्ध-गोलाकार चंद्रमा धारण किए हुए हैं। उनके माथे पर यह अर्ध चाँद घंटा के समान प्रतीत होता है, अतः माता के इस रूप को माता चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।
तिथि: चैत्र शुक्ल तृतीया सवारी: बाघिन अत्र-शस्त्र: दस हाथ - त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल तथा वरण मुद्रा। कमल का फूल, तीर, धनुष और जप माला तथा पांचवें अभय मुद्रा में। मुद्रा: शांतिपूर्ण और अपने भक्तों के कल्याण हेतु। ग्रह: शुक्र शुभ रंग: स्लेटी 📲 https://www.bhaktibharat.com/festival/navratri#3matachandraghanta
शारदीय नवरात्रि नौ दिनों का उत्सव है, सभी नौ दिन माँ आदि शक्ति के विभिन्न रूपों को समर्पित किए गये हैं। 22 सितम्बर 2025 को शुरू होगा। Next N











