#गला_भी_कटाया_मोक्ष_नहींपाया
एक बार काशी के नकली ब्राह्मणों ने ये ज्ञान देना शुरू किया कि जो काशी में मरता है वो स्वर्ग जाता है। जो मगहर में मरता है वो गधा बनता है।
यह सुनकर बुजुर्गों ने बच्चों से कहा कि मरना तो है, स्वर्ग मिल जाएगा। बच्चे भी उनके उद्धार की सोचते थे।
ब्राह्मणों ने स्कीम बनाई। गंगा किनारे काशी में गुफा बना ली। और ऊपर के सिरे पर एक करौंत छिपा दी। और यह बताया कि जो स्वर्ग शीघ्र जाना चाहता है। उसके लिए भगवान की तरफ से करौंत आता है। जो उससे गर्दन कटवा लेगा उसको स्वर्ग शीघ्र मिलता है। उनसे फीस भी लेते।
कबीर परमात्मा ने बताया :
काशी करौंत काहे लेही,
बिना भजन नहीं ढंग रे ।
कोटी ग्रंथ का योही अर्थ है,
करो साध सत्संग रे ॥










