जन्म और मृत्यु के बीच यह संसार का जो विस्तार है और यह पर नाना प्रकार के प्रपंच है केवल इनमें उलझे रहने के लिए यह जीवन नहीं मिला है। इस जीवन को सफल तभी बनाया जा सकता है जब जन्म-मृत्यु के बीच इन प्रपंचों को समझते हुए निष्कपट रुप से स्वयं पर आत्मशोध किया जाय और परमात्मा का हमें यहाँ भेजने का परम उद्देश्य समझा जाये। किसी भी कारण से यदि आप केवल इन प्रपंचो में ही फंसे रहते है और नियमित आत्ममंथन और आत्मशोध नहीं करते है तो परमात्मा द्वारा दिया गये इस जीवन का अपमान है। ।। नमो नारायण ।। गुरु राहुलेश्वर, भाग्य मंथन











