सूरजपाल पर कार्रवाई के बजाय उसे क्लीनचिट क्यों|
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सूरजपाल पर कार्रवाई के बजाय उसे क्लीनचिट क्यों|
अपनी नाकामी छुपा रही योगी सरकार|
भोले बाबा को कहाँ से मिली चमत्कारी शक्तियां|
रेप की सबसे अधिक घटनाएं सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े परिवा
भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला अखबार दैनिक जागरण एकबार फिर से नंगा हो गया है। फिर से इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ये अखबार अपनी धूर्तता और सरकार के प्रति अपनी चटुकारिता के लिए बीच बीच में जलील होता रहा है। हाथरस गैंगरेप व हत्या के मामले में 9 अक्टूबर को इस अखबार ने पहले पेज पर घटना से जुड़ी जो खबर छापी उसकी हेडिंग रखी, ‘युवती की मां व भाई ने की थी हत्या’। इस खबर के बाद एक बड़ा हिस्सा पीड़ित दलित परिवार के खिलाफ ही खड़ा हो गया। नफरत बढ़ गई और पूरा मामला न्याय की पटरी से उतरकर दलित बनाम सवर्ण हो गया। भला हो सीबीआई का जिसने 2 महीने के भीतर ही चार्जशीट दायर करके ये बता दिया कि दैनिक जागरण तुम झूठे हो, पीड़िता के साथ गैंगरेप किया गया उसके बात उसकी मौत हुई। दैनिक जागरण की जलालत इसके पहले कठुआ में बच्ची के साथ हुए रेप के दौरान हुई थी, बेशर्मी की सारी हदों को पार करते हुए अखबार ने पहले पेज पर लिखा, ‘कठुआ की बच्ची से नहीं हुआ था दुष्कर्म’ इस हेडिंग के बाद भाजपा के तमाम समर्थकों ने आरोपियों के समर्थन में रैली निकाल दी, भाजपा के विधायक राजीव जसरोटिया तक उस रैली में शामिल हुए, और जब सीबीआई का फैसला आया तब एकबार फिर से सब नंगे हो गए। सोचने वाली बात तो ये है कि आखिर इतनी हिम्मत इस अखबार को कहां से मिल रही जो बलात्कारियों की चिट्ठी या बयान को ही हेडलाइन बनाकर उनके पक्ष में माहौल बना दे रहा है। आप अगर कहेंगे कि ये हिम्मत सरकार से मिल रही तो मैं उसे खारिज नहीं करूंगा। इसी अखबार ने 2 अक्टूबर के संस्करण में हाथरस से जुड़ी खबर फिर से छापी, इसबार हेडिंग बनाया, ‘तीन चरणों की फोरेंसिक जांच में नहीं मिले हाथरस की युवती के साथ दुष्कर्म के साक्ष्य’ अखबार कितनी तन्मयता के साथ आरोपियों के समर्थन में खड़ा था इसका अंदाजा आप लगा ही लिए होंगे। सेम यही बयान यूपी के एडीजी प्रशांत कुमार ने भी कहा था, प्रशांत कुमार के मुताबिक लड़की के साथ रेप नहीं हुआ, गर्दन में गंभीर चोट के कारण मौत हुई, कोर्ट ने इस बयान पर संज्ञान लेते हुए यूपी पुलिस को फटकार भी लगाई थी। लेकिन फटकार से कहां कुछ होने वाले वाला इनका। योगी आदित्यनाथ की सरकार को बचाने के लिए गोदी मीडिया ने अपनी पूरी ताकत झोक दी। भक्ति में सबसे आगे चल रहे रिपब्लिक टीवी के अर्णब गोस्वामी पहले ही जाकर योगी सरकार की गोद में बैठ गए, और आरोपियों व सरकार को क्लीनचिट देने में जुट गए। तिहाड़ से लौटे सुधीर चौधरी पूछ रहे थे कि 8 दिन बाद परिवार गैंगरेप की बात क्यों कर रहा है? योगी सरकार को लगातार घिरता देखकर टाइम्स नाऊ व ऑप इंडिया बचाव में उतरे, हेडिंग बनाई योगी सरकार को बदमान करने के लिए 100 करोड़ की फंडिंग हुई, जब भी भाजपा की सरकार कहीं मुसीबत में होती है पीएफआई का नाम सामने लाकर उक्त सरकार को बचा लिया जाता है। PFI मानों BJP के लिए सजीवन बूटी का काम करता है। पीड़ित परिवार के साथ क्या क्या जुल्म नहीं किया गया। पुलिस ने रात में लाश जला दी, पीड़िता की मां को गाड़ी से घसीटकर उतार दिया गया। परिवार को अधिकारी धमका रहा कि मुआवजा मिल गया है अब चुप हो जाए, तुमको यही रहना है, पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट तक के आदेश हो गए। सवर्ण ने दलित परिवारों के खिलाफ पंचायत शुरु कर दी। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह दलित परिवार को अपनी बेटी को संस्कार सिखाने की बात कर रहे थे। इधर जातिवाद और नफरत से भरी मीडिया भी आरोपियों के समर्थन में आ गई। जिन्हें लगता है कि ये मीडिया दलितों की आवाज उठाएगी वह हाथरस मामले को करीब से देखें। आपका भ्रम टूट जाएगा।
उत्तर प्रदेश का हाथरस जिला। सितंबर 2020 में एक दलित लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या के बाद चर्चा में आ गया था। इससे भी अधिक चर्चा इस बात की शुरु हो गई कि पीड़िता की हत्या व गैंगरेप के लिए जिसको आरोपी बनाया गया वह बेकसूर हैं, सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने उनका पक्ष लेकर लिखना शुरु कर दिया। ये लड़ाई सवर्ण बनाम दलित हो गई। राजनीतिक पार्टियों ने भी इसे अपने तरह से भुनाना शुरु कर दिया। भाजपा के तमाम नेताओं ने पीड़ित पक्ष को ही आरोपी साबित करने के लिए पूरा जोर लगा दिया. घटना के करीब तीन महीने बाद CBI ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है जिसके मुताबिक चारों आरोपियों पर हत्या व गैंगरेप का आरोप लगाया गया है। ये आरोप पीड़िता के मरने से पहले अस्पताल में दिए गए बयान के आधार पर तय किया गया है। आरोपियों के वकील मुन्ना सिंह पुंढीर ने कहा, संदीप, लवकुश रवि व चौथे आरोपी रामू के ऊपर रेप व हत्या का आरोप लगाया गया है। ऐसा नहीं है कि देश में हाथरस जैसा कोई और केस नहीं हुआ, केस तो तमाम आए लेकिन जितना हंगामा इस मामले को लेकर हुआ उतना किसी और मामले में नहीं हुआ। देश भर में प्रदर्शन हुए, यूपी सरकार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दावा किया था कि पीड़िता के साथ गैंगरेप हुआ ही नहीं। पुलिस के इस बयान को भाजपा व हिन्दू सेना के तमाम नेता ले उड़े, उसी के आधार पर बताया जाने लगा कि पीड़िता के भाई ने ही अपनी बहन की हत्या की, जब मामला गर्माया तो कोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकार लगाई। हाथरस मामले में आरोपियों पर शिकंजा कसने में राष्ट्रीय मीडिया व विपक्षी पार्टियों की भूमिका सबसे अहम थी। मीडिया ने यूपी पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया, रात-दिन एक करके आरोपियों को जेल करवाई, सरकार पर दबाव बढ़ा तो सीबीआई जांच के आदेश देने पड़े, आज उसी जांच का नतीजा है कि आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, हालांकि ये पूरी लड़ाई नहीं है, अभी लंबी लड़ाई है। पीड़ित परिवार को हर स्तर पर संघर्ष को पार करना है। उसे उन सवर्णों से भी लड़ना है और उनकी मानसिकता से भी जो कहते थे हम तो इनके यहां का पानी नहीं पीते, उनकी बेटियों के साथ रेप कैसे करेंगे। ये चार्जशीट उन लोगों के मुंह पर जोरदार तमाचा है जिन्हें लगता था कि आरोपी बेकसूर हैं, सीबीआई जल्द ही इस जांच को पूरी करे, और आरोपियों को दोषी साबित करके सजा दिलवाए। ताकि ऐसा अपराध करने से पहले आरोपी कांप जाएं।
The CBI charge sheet, setting down gang rape and murder as the charges in the #HathrasCase is a tight slap across the face of propagandists from TIMES NOW, REPUBLIC, AAJ TAK, ZEE etc. who viciously character assassinated the victim to try and create a fake narrative. https://www.instagram.com/p/CI8_ZtcAKoP/?igshid=1b6tix02dppqp
हाथरस केस की सुनवाई आज,डीएम और SP कोर्ट में पेश करेंगें हलफनामा
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए कथित गैंगरेप में पीड़िता के परिवार द्वारा की गई मांगों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज एक याचिका पर सुनवाई होनी है | आपको बता दें कि आज होने वाली सुनवाई के दौरान, हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार और निलंबित एसपी विक्रांत वीर अदालत में अपने बचाव वाला हलफनामा पेश करेंगे | हालांकि पीड़ित परिवार सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद नहीं रहेगा | पीड़ित परिवार की तरफ से उनकी वकील सीमा कुशवाहा कोर्ट में मौजूद रहेंगी |
साल 2012 में निर्भया गैंगरेप मामले की पैरवी करने वाली वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने 24 अक्टूबर को हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था | हलफनामे में पीड़ित परिवार के लिए दिल्ली में एक स्थायी घर की मांग की गई है |
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वकील ने पीड़ित परिवार के लिए मांगी घर और नौकरी
वकील सीमा कुशवाहा ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि गांव में ऊंची जातियों का ज्यादा प्रभाव है, और पीड़ित परिवार दलित है, सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें दिल्ली में घर दिया जाना चाहिए | वहीं पीड़ित परिवार ने एक सदस्य के लिए नौकरी की भी मांग की है | दरअसल सीएम योगी ने पीड़िता के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक उन्हें घर नहीं मिल सका है |
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पीड़ित परिवार ने कोर्ट से उन्हें सुरक्षा देने की भी गुहार लगाई थी, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी | पीड़िता के परिवार ने मामले में संबंधित अधिकारियों को हटाने की भी मांग की थी |
दलित लड़की के साथ हुआ था गैंगरेप
हाथरस में 19 साल की दलित लड़की के साथ 14 सितंबर को कथित तौर पर ऊंची जाति के चार लड़कों ने गैंगरेप और क्रूरता की थी | 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी | 30 सितंबर को परिवार की गैरमौजूदगी में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया था |
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