योगी सरकार ने उठाया एक महत्वपूर्ण कदम
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योगी सरकार ने उठाया एक महत्वपूर्ण कदम
सरकार वापस ले नेमप्लेट फैसला|
ग्रामीण आवासीय अभिलेख का डिजिटल वितरण कार्यक्रम का जनपद में हुआ सजीव प्रसारण
ग्रामीण आवासीय अभिलेख का डिजिटल वितरण कार्यक्रम का जनपद में हुआ सजीव प्रसारण
स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी अभिलेख (घरौनी) वितरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन। अरविन्द कुमार अमेठी,स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी अभिलेख घरौनी वितरण के कार्यक्रम में मा0 मुख्यमंत्री उ0प्र0 श्री योेगी आदित्यनाथ जी के द्वारा प्रदेश के 11 लाख ग्रामीणों को ऑनलाइन माध्यम से घरौनी का वितरण किया गया। जिसका सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट सभागार गौरीगंज सहित सभी तहसीलों में किया गया। जिसे…
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निराश्रितों, गरीबों, पात्र वृद्ध किसानों को प्रदेश सरकार12 हजार वार्षिक दे रही है पेंशन
निराश्रितों, गरीबों, पात्र वृद्ध किसानों को प्रदेश सरकार12 हजार वार्षिक दे रही है पेंशन
अरविन्द कुमार अमेठी। प्रदेश सरकार समाज के गरीबों, किसानों, असहायों, निराश्रितों के विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाकर उनकों हर तरह की सहायता कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार का समाज कल्याण विभाग बुजुर्गों व किसानों के लिए वृद्धावस्था/किसान पेंशन योजना चला रही है। इस योजनान्तर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे स्त्री-पुरूष जिनकी वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 46080 रू0 व शहरी क्षेत्र में 56460…
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यूपी टेट की परीक्षा का पेपर लीक करने वाले अपराधी अब योगी सरकार के शिकंजे से नहीं बच पाएंगे। अपराधियों पर सख्त योगी सरकार के निर्देशानुसार पेपर लीक करने वाले दोषियों पेपर कड़ी कार्यवाही की जा रही है। #YogiSarkar https://www.instagram.com/p/CW-J-FgFtZ0/?utm_medium=tumblr
यूपी के मुरादनगर में एक श्मशान घाट में कुछ लोग एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे जहां छत गिरने से करीब 24 लोगों की जान चली जाती है कई लोग घायल भी हो गए। बारिश से बचने के लिए जिस इमारत के नीचे लोग खड़े थे उसे हाल ही में बनाया गया था। हल्की गुणवत्ता के उपकरणों के इस्तेमाल से भवन इतना कमजोर था कि उसकी छत गिर गई।इस बीच एक्शन में यूपी पुलिस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया कड़ा एक्शन, इलाके में मचा हड़कंप, यूपी के मंत्री ने व्यक्त किया दुख जैसी तमाम हैडिंग आज कल परसो तक न्यूज़ चैनलों में दौड़ती रहेंगी। पर सोचने वाली बात ये है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे? गलती किसकी है? क्या पीड़ित परिवार को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करना काफी है? या योगी जी का दुख व्यक्त करना काफी है? अगर यह घटना किसी और राज्य में हुई होती तो? यह भी पढ़ें: गौ रक्षा की बात करने वाले योगी के शासन में गाय के लिए पानी नहीं, प्रधान बोले- फंड दीजिए वरना छोड़ देंगे पशु यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल लगातार उठते रहते है, विपक्ष सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा। देखा जाए तो मुरादनगर में 'करप्शन' की ही छत गिरी है, ये हादसा यूपी में चल रहे भ्रष्टाचार का ही नतीजा है, इस घटना में ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया गया है, हादसे में जूनियर इंजिनियर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 337, 338, 427, 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह भी पढ़ें: यूपी की जनता हाथरस घटना भूली भी नहीं और सोनभद्र में फिर वैसे ही घटना सामने आ गईमहाराष्ट्र के भिवंडी मामले को अगर याद करें तो वो भी कुछ ऐसी ही घटना थी मलवे में दबने की वजह से करीब 25 लोगों की जान चली गई थी, उस मामले बृहन्मुंबई नगर निगम ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था लेकिन श्मशान मामले में योगी सरकार ठेकेदार से आगे बढ़ी ही नहीं।एक ठेकेदार को पकड़ लेने से यूपी की यह समस्या खत्म नहीं होने वाली इससे पहले यूपी के एटा जिले में एक निर्माणाधीन पुल का पिलर और गार्डर गिर गया था, इस हादसे में 2 श्रमिकों की मौत हुई थी और कई श्रमिक घायल हो गए थे, बाइपास के लिए बनने वाला पुल अगर टूटता है तो दो शहर अलग हो जाते हैं और इस एक पिलर को बनने में सालों लग जाते हैं। यह भी पढ़ें: हाथरस केस : मुस्लिम डॉक्टरों को नौकरी से निकालकर किसे बचा रही है योगी सरकार? मुरादनगर की घटना को 4 दिन में सब वैसे ही भूल जाएंगे जैसे हाथरस की घटना को लोग भूल गए, सरकार क्या कर रही दोषियों का क्या हुआ ये किसी को नहीं पता। लेकिन मुरादनगर जैसी घटना शहर की सोसाइटियों में भी हो सकती है, वजह ये है कि बहुमंजिला सोसायटियों में बिल्डर के बनाए गए फ्लैट्स की गुणवत्ता खराब होने से निवासियों को अनहोनी का डर सता रहा, मुरादनगर की घटना के बाद लोग इमारतों की खामियों पर सवाल उठाने लगे हैं, बाहर से चमचमाती इमारतों के अंदर का हाल कुछ और है सोते हुए सिर पर प्लास्टर गिरते है, ईंट दिखने लगी, लोगों में बिल्डर के खिलाफ आक्रोश है। सोमवार को नोएडा के सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन सोसायटी के सीजी-2 टावर के कारिडोर में अचानक प्लास्टर भरभरा कर गिरने की घटना सामने आई है। यह भी पढ़ें: यूपी का किसान कृषि कानून के विरोध में नहीं? क्या वह 1000 रु. प्रति क्विटल में धान बेचकर खुश है? बता दें कि 18 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई की जितनी भी इमारतें बनाई जाती हैं, उनका नक्शा पास कराने से पहले स्ट्रक्चर के भूकंपरोधी होने के लिए स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जमा करना होता है, लोगों की सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था की गई है पर कई बार इस पर ध्यान नहीं दिया जाता, गुणवत्ता की जांच किए बिना आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि गुणवत्ता की जांच के लिए कोई नियम नहीं है, यही कारण है कि बिल्डर धन कमाने के लिए खराब गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग करते है और एक-दो साल बाद नतीजा दिखने लगता है। यह भी पढ़ें: BJP ने जिसकी फोटो लगाकर किया कृषि कानून का प्रचार, वह सिंघू बॉर्डर पर मौजूद, कहा- मैं किसानों के साथअब सवाल यह है कि अगर इन्हीं ढीले नियम कानून के नीचे दबकर लोगों की जान चली जाती है तो इसका जिम्मेदार प्राधिकरण, बिल्डर, इमारत को बनाने वाला ठेकेदार या योगी जी है जो राम मंदिर के अलावा किसी और बिल्डिंग में फोकस ही नहीं करते। यह भी पढ़ें - 18 महीने तक विदेशी बताकर डिटेंशन सेंटर में रखा, अब कहा- तुम बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हो
यूपी के मुरादनगर में एक श्मशान घाट में कुछ लोग एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार में पहुंचे थे जहां छत गिरने से करीब 24 लोगों की जान चली जाती है कई लोग घायल भी हो गए। बारिश से बचने के लिए जिस इमारत के नीचे लोग खड़े थे उसे हाल ही में बनाया गया था। हल्की गुणवत्ता के उपकरणों के इस्तेमाल से भवन इतना कमजोर था कि उसकी छत गिर गई।इस बीच एक्शन में यूपी पुलिस, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया कड़ा एक्शन, इलाके में मचा हड़कंप, यूपी के मंत्री ने व्यक्त किया दुख जैसी तमाम हैडिंग आज कल परसो तक न्यूज़ चैनलों में दौड़ती रहेंगी। पर सोचने वाली बात ये है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे? गलती किसकी है? क्या पीड़ित परिवार को दो-दो लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करना काफी है? या योगी जी का दुख व्यक्त करना काफी है? अगर यह घटना किसी और राज्य में हुई होती तो?यूपी की कानून व्यवस्था पर सवाल लगातार उठते रहते है, विपक्ष सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा। देखा जाए तो मुरादनगर में 'करप्शन' की ही छत गिरी है, ये हादसा यूपी में चल रहे भ्रष्टाचार का ही नतीजा है, इस घटना में ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया गया है, हादसे में जूनियर इंजिनियर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 337, 338, 427, 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।महाराष्ट्र के भिवंडी मामले को अगर याद करें तो वो भी कुछ ऐसी ही घटना थी मलवे में दबने की वजह से करीब 25 लोगों की जान चली गई थी, उस मामले बृहन्मुंबई नगर निगम ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था लेकिन श्मशान मामले में योगी सरकार ठेकेदार से आगे बढ़ी ही नहीं।एक ठेकेदार को पकड़ लेने से यूपी की यह समस्या खत्म नहीं होने वाली इससे पहले यूपी के एटा जिले में एक निर्माणाधीन पुल का पिलर और गार्डर गिर गया था, इस हादसे में 2 श्रमिकों की मौत हुई थी और कई श्रमिक घायल हो गए थे, बाइपास के लिए बनने वाला पुल अगर टूटता है तो दो शहर अलग हो जाते हैं और इस एक पिलर को बनने में सालों लग जाते हैं।मुरादनगर की घटना को 4 दिन में सब वैसे ही भूल जाएंगे जैसे हाथरस की घटना को लोग भूल गए, सरकार क्या कर रही दोषियों का क्या हुआ ये किसी को नहीं पता। लेकिन मुरादनगर जैसी घटना शहर की सोसाइटियों में भी हो सकती है, वजह ये है कि बहुमंजिला सोसायटियों में बिल्डर के बनाए गए फ्लैट्स की गुणवत्ता खराब होने से निवासियों को अनहोनी का डर सता रहा, मुरादनगर की घटना के बाद लोग इमारतों की खामियों पर सवाल उठाने लगे हैं, बाहर से चमचमाती इमारतों के अंदर का हाल कुछ और है सोते हुए सिर पर प्लास्टर गिरते है, ईंट दिखने लगी, लोगों में बिल्डर के खिलाफ आक्रोश है। सोमवार को नोएडा के सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन सोसायटी के सीजी-2 टावर के कारिडोर में अचानक प्लास्टर भरभरा कर गिरने की घटना सामने आई है।बता दें कि 18 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई की जितनी भी इमारतें बनाई जाती हैं, उनका नक्शा पास कराने से पहले स्ट्रक्चर के भूकंपरोधी होने के लिए स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जमा करना होता है, लोगों की सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था की गई है पर कई बार इस पर ध्यान नहीं दिया जाता, गुणवत्ता की जांच किए बिना आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। लेकिन सोचने वाली बात ये है कि गुणवत्ता की जांच के लिए कोई नियम नहीं है, यही कारण है कि बिल्डर धन कमाने के लिए खराब गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग करते है और एक-दो साल बाद नतीजा दिखने लगता है।अब सवाल यह है कि अगर इन्हीं ढीले नियम कानून के नीचे दबकर लोगों की जान चली जाती है तो इसका जिम्मेदार प्राधिकरण, बिल्डर, इमारत को बनाने वाला ठेकेदार या योगी जी है जो राम मंदिर के अलावा किसी और बिल्डिंग में फोकस ही नहीं करते।यह भी पढ़ें - 18 महीने तक विदेशी बताकर डिटेंशन सेंटर में रखा, अब कहा- तुम बांग्लादेशी नहीं बल्कि भारतीय हो
योगी के यूपी में लगातार गायों की मौत हो रही है, प्रदेश सरकार ने 2019 जनवरी में आवारा पशुओं की देखभाल के लिए अस्थायी गोवंश आश्रय शुरू किया था, जिसका फंड राज्य सरकार देती है, सरकार प्रति गाय के लिए 30 रुपये रोजाना देती है।इस बीच कई जिलों के पंचायत प्रमुखों ने CM आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि गौशाला संचालक सरकारी फंड फरवरी से नहीं मिला है, अब तक भूख से कई जानवरों की मौत हो चुकी है।पंचायत प्रमुखों ने स्पष्टा कह दिया है कि अगर अब 25 दिसंबर तक सरकार ने फंड के बारे में नहीं सोचा तो पशुओं को छोड़ना पड़ेगा, अब कोई अपना निजी पैसा नहीं लगा सकता।साल 2018 में 43 गोशालाएं शुरू की गई थी आज यहाँ कुल 15,000 आवारा पशुओं की देखभाल की जाती है, बुंदेलखंड के वरिष्ठ पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी ने भी कहा कि CM को कई पत्र लिखे गए लेकिन सायद इसका कोई फायदा नहीं होता।सोचने की बात ये है कि अगर गोवंश आश्रय में पशुओं की देखभाल नहीं हो पा रही तो आवारा भटक रहे पशुओं का क्या होगा, हाल ही में ललितपुर में कुछ गायों की ठंड और भूख से मौत हो गई, इसका वीडियो भी सामने आया। इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी गोवंश की स्थिति पर चिंता जताई उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दिया की वो छत्तीसगढ़ कांग्रेस द्वारा चलाई जा रही ‘गोधन न्याय योजना’ अपनाए। प्रियंका ने योगी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ये कोई पहली तस्वीर नहीं है लगातार ऐसी घटना सामने आ रही, सरकार कड़े कदम नहीं उठा रही आखिर इसका जिम्मेदार है कौन। गोशालाएं खोलना ही उपलब्धि नहीं है बल्कि समय समय पर चारा और पानी का फंड देखना भी जरूरी है, गोशालाओं में सिर्फ असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार मिलता है। मासूम जानवरों की मौत पर 4 दिन चर्चा होती है बाद में घटना पशुओं के साथ दफन कर दी जाती है, गौरतलब है कि यही हाल पश्चिमी यूपी का भी है, राष्ट्र चेतना मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि कई बार सरकार के पैसे पहुंचने में देरी हो जाती है इस दौरान NGO मदद करते हैं लेकिन वो भी अपनी सीमा से बहार नहीं मदद कर सकते।देखा जाए तो सरकार द्वारा दिया जा रहा 30 रु. इतना कम है कि उसमें एक गाय का एक दिन का पूरा चारा भी नहीं हो सकता, गायों के लिए पानी तक नहीं है, जमीनी हकीकत ये है कि गायें गौशालाओं से गायब हो जाती हैं, स्थिति दयनीय है।