असली आज़ादी – क्या आज़ादी सिर्फ़ बाहरी होती है?
जब जीवन बाहर से खुला और भीतर से बंद होआज का इंसान बाहर से बहुत आगे बढ़ चुका है,लेकिन भीतर कहीं अटका हुआ है।नौकरी की मजबूरीसमाज की अपेक्षाएँरिश्तों का दबाव“लोग क्या कहेंगे” का डरहर समय कुछ साबित करने की बेचैनीऔर यही अनुभव हमें धीरे-धीरे मानसिक कैद में डाल देता है।हम हँसते हैं, बात करते हैं, काम करते हैं—लेकिन भीतर कहीं घुटन बनी रहती है।
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