छात्र जीवन से निकल कर जब हम सब अपने अपने कर्म क्षेत्रों में निकल जाते है और फिर एक अरसे बाद पुनः मुलाक़ात होती है तो बरबस ही निकल पढ़ते है अपने छात्रावास जीवन ( Sir PCB ) के क़िस्से और वो उस सुनहरे जीवन की यादें,फिर से ताज़ा हो जाती है,फिर समय अपनी रफ़्तार में होता है और एक बार फिर बिछड़ने के वक्त आजाता है,यक़ीन जाने हमारी आत्माएँ एक है शायद यह हमारी यूनिवर्सिटी परम्परा “जितने वृक्ष उतनी शाखायें…” या संस्कारों का नतीजा है। राजकुमार अग्रवाल ( SP Rural Bareilly ) ज्योति शुक्ल ( Add Commissinor Sale Tax Bareilly ) #friendship #hostelmates https://www.instagram.com/p/CSosz0ZFm2a/?utm_medium=tumblr
















