कालाष्टमी आज: भैरवजी को इस तरह करें प्रसन्न, होती हैं मनोकामनाएं पूरी
आज (गुरुवार) कालाष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव के अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है। हर माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है।
कालाष्टमी के दिन भगवान शंकर के तीन भैरव स्वरूप यानि काल भैरव की उपासना की जाती है। कहते हैं आज के दिन भगवान शंकर के काल भैरव स्वरूप की उपासना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होंगी और आपकी मनचाही मुरादें पूरी होती है। साथ ही आज के दिन काल भैरव के साथ-साथ श्री शीतला माता के निमित्त पूजा-अर्चना व व्रत करने का भी विधान है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता। पूजा करने से मन के भय दूर हो जाते है। काल भी इनसे भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है।
कालाष्टमी पर भैरव की पूजा विधि:- प्रातः उठकर स्नान-ध्यान के बाद भगवान भैरव के घर के ही मंदिर में भैरव नाथ को अबीर, गुलाल, चावल, फूल और सिंदूर चढ़ाएं।भगवान भैरव की कृपा पाने के लिए नीले फूल चढ़ाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से जातक को भैरव कृपा मिलेगी और मनोकामना भी पूरी होगी।
कालाष्टमी पर इस तरह पूजा करने से भैरव बाबा भक्त को जीवन में अपार धन, यश और सफलता देते हैं। मान्यता है कि तमाम तरह के कष्टों से मुक्ति और कालभैरव भगवान की कृपा पाने के लिए कालाष्टमी के दिन किसी मंदिर में जाकर काजल और कपूर का दान करें। धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव के मंदिर में जाकर चमेली का तेल और सिंदूर अर्पित करें।
नींबू की माला करें अर्पित:- मान्यता है कि काले उड़द, काले तिल और 11 रुपए काले कपड़े में रखकर भगवान भैरव को अर्पित करने से इस दिन शरीर की सारी नकारात्मकता दूर हो जाती है। कहते हैं कि कालाष्टमी के दिन भगवान भैरव को नींबू की माला चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
काल भैरव की विधिवत पूजा करने से मन के भय दूर हो जाते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही कालभैरव की पूजा करने वालों से नकारात्मक शक्तियां भी दूर रहती हैं। काल भैरव की पूजा करने से शनि और राहू जैसे ग्रह भी शांत हो जाते हैं। कालभैरव की पूजा करने से शत्रु बाधा और दुर्भाग्य दूर होता है और सौभाग्य जाग जाता है।
स्कन्द पुराण में माता शीतला की अर्चना का स्तोत्र ‘ शीतलाष्टमी ’ के रूप में प्राप्त होता है। श्री शीतला माता का मंत्र
शास्त्रों में भगवती शीतला की वंदना के लिए यह पंक्तियाँ भी बताई गई हैं –
वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्
अर्थात्- गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाडू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तक वाली भगवती शीतला की मैं वंदना करता हूं।
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