“Azadi” of speech and expression: Why events of 9th Feb at JNU go beyond an intent to dissent - Shridev Sharma
seen from Canada

seen from Malaysia
seen from Philippines

seen from United States
seen from Türkiye

seen from United States
seen from Singapore

seen from United States
seen from India
seen from Brazil
seen from Canada

seen from Russia
seen from Türkiye
seen from Canada
seen from Argentina

seen from United States
seen from Brazil
seen from Indonesia

seen from United States
seen from Russia
“Azadi” of speech and expression: Why events of 9th Feb at JNU go beyond an intent to dissent - Shridev Sharma
गद्दारों से आजादी… न कि गद्दारों को आजादी
भारत में माओवादी आतंकवादी पिछले दस साल में बहुत तेजी से बढ़ें हैं। एक समय बंगाल में वामपंथियों ने नक्सलियों को कुचल दिया था। पर वो एक अलग पीढ़ी थी। आज वाम पंथी सत्ता खो बैठे हैं। अलगथलग हो कर हताशा में हैं। इन के लोग अखबारों और अफसर-शाही में हैं। भारत के बौद्धिक धरातल पर इनका दबदबा अभी भी है। ये अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमे विभाजन से पूर्व के दिनों की एकता का जोश भर गया है। इन के अलग धड़े अब एक हो रहे हैं। बाहर से ये जो मर्जी कहें, पर अंदर से इन्हें सशस्त्र संघर्ष से भी परहेज नहीं।
पिछले दस वर्षों में माओवादी आतंकवादियों ने जंगलों पर कब्जा कर लिया है। इनका विस्तार हैरानी भरा है। ये उन गृह मंत्रियों के काल में फले फूले जिनमें से एक ने इशरत जहाँ को न्यायालय में आतंवादी मानने से मना कर दिया, तो दूसरे ने सच्चे राष्ट्रभक्त संघ को आतंकवादी कह डाला। अब ये भारत के अनादि काल से चले आ रहे प्राचीनतम राष्ट्रवाद की तुलना मुसोलिनी के फासीवाद से कर रहे हैं।
भारत में स्वयं सेवक संघ का हाल मुस्लिमब्रदर हुड जैसा होगा ये मूर्खता पूर्ण भ्रम फैलाने में इन्हें ज़रा भी संकोच नहीं है
सोवियत-पतन के बाद दक्षिण एशिया में सोवियत सर्वहारा संयुक्त राष्ट्र को स्थापित करने का सपना ये कामरेड खुली आँखों से देख रहे हैं। भारत में स्वयं सेवक संघ का हाल मुस्लिमब्रदर हुड जैसा होगा ये मूर्खता पूर्ण भ्रम फैलाने में इन्हें ज़रा भी संकोच नहीं है।
भारत के अंदर कुछ शिक्षित, भ्रष्ट और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिये देशद्रोह तक करने से न हिचकने वालों के लिये मार्क्स का दर्शन और लेनिन-स्टालिन का खूनी तांडव मार्ग दर्शक बन गया है। इनके लिये राष्ट्रवाद अंग्रेजों की चालबाजी और फासीवाद के अलावा कुछ नहीं है।
हो सकता है कि आप माने कि ये सब मेरे मन का भय जनित भ्रम है । अगर ये भ्रम ही होगा , मुझे अपार संतोष होगा। मैं पिछले तीन से अधिक दशकों से दिल्ली को देख रहा हूँ ।इस दौरान राष्ट्रवादी राजनैतिक दर्शन के फलस्वरूप प्राप्त संवैधानिक मूल अधिकारों में से एक, अभिव्यक्ति की आजादी, की आड़ में कश्मीर के आतंकवादी जेहादियों के समर्थन में संसद तक, ऐसा शर्मनाक नंगा नाच मैंने पहली बार देखा है। ये संसद पर हमले का छाती ठोक कर समर्थन कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय को हत्यारा और सैनिकों को बलात्कारी ठहरा रहे हैं। ये संविधान की आड़ में संविधान विरोधी गतिविधियाँ कर रहे हैं। ऊपर से छाती ठोक कर झुठला भी रहे हैं।
इतना साहस तभी आता है जब धन हो समर्थन हो और विवेक नष्ट हो गया हो। महत्वाकांक्षा के इंद्रधनुष ने आँखों को अँधा और बुद्धि को नष्ट कर दिया हो। जब वैदिक काल से चले आ रहे राष्ट्रवाद की तुलना मुसोलिनी के राष्ट्रवाद से की जाए, मानववाद फासिज्म दिखाई दे । तुर्रा ये कि कहने वाले हैं कौन? यूरोप से लेकर एशिया तक क्रांति के नाम पर खूनी होली खेलने वाले मानवता को शर्मसार करने वाले दोगले और गद्दार कम्यूनिष्ट, वाह वाह वाह!
जेनयू की घटना पर एक जेनयू समथर्क से मेरा तीखा संवाद
Thank you Indian Army for your loyal Sacrifice
बहुत दिनों से सोच रहा था कुछ लिंखू कुछ मै भी करू मै भी अपनी बोलने की आज़ादी का उपयोग करूँ अच्छा मुझे किसी से शाब्दिक वार्तालाप या संवाद करने में बहुत ही आनंद आता है तो चल ही रहा था की हमारे गिरधारी भईया मिल गए ।जय हिन्द के साथ कुछ हाल चाल हुई और वार्तालाप सुरु हुआ ,गिरधारी भईया पूंछने लगे की भईया ये मोदी काम धाम तो करता नही है बस बोलता है ? मै सोच…
View On WordPress
JNU Row: The Part We Don't Wish To Agree To
JNU Row: The Part We Don’t Wish To Agree To
If u have been staying in India for the past 2 weeks, then your brain is probably bombarded already with a lot of information (most of which u didn’t need) on the JNU row and forced to even have your own particular viewpoint on the whole matter- depending on the news channel you blindly follow.
People all over the social media are defending their point while attacking anything that seems to…
View On WordPress
Freedom of expression in India - Wikipedia, the free encyclopedia
Are restrictions on freedom of expression under article19(2) of Indian Constitution applicable in #JNURow, at least in principle, by the event or speeches or reporting? You be the judge. I feel it was…
I am not a Secular But I don't hate Muslim cap
I am not a Secular But I don’t hate Muslim cap
You are thinking that why i am saying that ” I am not a Secular but I don’t hate Muslim cap ” .
'' I am not a Secular but I don't hate Muslim cap 'We love humanity
I am saying that i am not a Secular because in the present era there are secularism is for show-off .People are not want to be a real secularist but also want that our community always treat them as a Secularist so who they are…
View On WordPress