पद्मावती देश का गौरव है तो दीपिका पादुकोण भी देश का गौरव है , वो भी भारत की बेटी हैं , इसी संस्कृति में पली बढ़ी हैं।
भारतीय संविधान आपको आजादी देता है आप अपने हितों की रक्षा ले लिए विरोध कीजिए लेकिन यह आजादी नही देता है कि आप किसी की नाक काट लीजिए , या गर्दन काट लीजिए । आप मानव है ,मानवता के साथ अन्याय के ख़िलाफ़ न्याय की बात करे ।
आज से पहले कई बार इतिहास को लेकर कई फिल्में बनी है किसी ने कोई विरोध नही किया , कोई भी सामाजिक संगठन आगे नही आया और ना किसी की धार्मिक भावनाएं भड़की इसका मुख्य करना यही रहा कि वो सभी आज के विरोध के अनुरूप सही नही था ।
सावित्री बाई फुले जब समाज में शिक्षा की अलख जगाने चली तो उनपर कीचड़ फेंकने वाले भी इस संस्कृति की दुहाई देने वाले लोग थे । जब फूलन देवी पर फिल्म बनी तो विरोध की जगह वीर योद्धाओं द्वारा किसी एक महिला को गिद्दों की तरह नोच खाने पर तालियां बजाई जाती थी वो भी इनका विरोध इसलिए नही किया गया क्योंकि वो दबे कुचले समाज की महिलाएं थी वो कभी भारतीय संस्कृति का हिस्सा नही रही होगी आज के विरोधियो के अनुसार ।
रानी पद्मावती पर बनी फिल्म में इतिहास से कहाँ छेड़छाड़ की गई है यह कहना अभी मुश्किल है क्योंकि अभी फिल्म देखी नही गई है , हां अगर सच में ही इतिहास तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है तो विरोध होना चाहिए मगर सभ्य तरीके से । किसी की नाक काटने और गर्दन काटने का अधिकार किसी को नही है ।
कहानियां कुछ भी रही होगी लेकिन अलाउदीन ख़िलजी ने चितौड़ जीतने से पहले जैसलमेर और रणथम्भोर भी जीते थे । साम्रज्यवाद में जिस जगह को राजा जीत लेता था वहाँ उसी का शासन होता था ।
रानी पद्मावती और उनके साथ और महिलाओं ने जौहर किया यह उनका अपने खुद के प्रति समर्पण था । खुद को किसी अन्य पुरुष को सुपुर्द नही करना उनकी वीरता थी , अपने राजा के प्रति नि:श्छल प्रेम था ।
वर्तमान में हर रोज कही न कहीं किसी मज़दूर , किसान , गरीब की बेटी की आबरू लुटती हैं जब कहीं भी विरोध नही होता , ना ही किसी की भावनाएं आहत होती और ना ही कोई धार्मिक और सामाजिक संगठन आगे आते क्या वो बेटियां भारत का गौरव नही है ।
इतिहास की रक्षा और वर्तमान में वहशी कितनी अजीब बात है ।
“आज ,आने वाला कल का इतिहास होगा और फिर कोई जायसी 300 साल बाद लिखेगा दीपिका पादुकोण छरहरी काया, और सुन्दता की मिसाल थी उसकी मछली जैसी आँखे और गुलाब की नर्म पंखुड़ियों जैसे होठ इतने सुंदर थे कि हर कोई उसमे मोहित हो जाता था ।”