दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) कठपुतली कॉलोनी में रहने वाले सभी परिवारों को पक्का घर देगा। बुधवार को डीडीए के प्रधान आयुक्त आवास और भूमि निपटान जय प्रकाश अग्रवाल ने कहा, प्राधिकरण कॉलोनी में रहने वाले परिवारों को घर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि परिवारों को जबरन ट्रांजिट कैंप में भेजने की बात गलत है। परिवारों को सहमति से ट्रांजिट कैंप भेजा जा रहा है। कैंप में उनके रहने की समुचित व्यवस्था की गई है। अग्रवाल ने बताया कि 1150 परिवारों को कैंप में पहुंचाया जा चुका है। डीडीए ने कॉलोनी का पुनर्वास करने के लिए आनंद पर्वत इलाके में कैंप बनाया है। डीडीए अधिकारी के अनुसार, उम्मीद है कि होली तक बाकी परिवार भी ट्रांजिट कैंप में पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि कमजोर आर्य वर्ग के इन लोगों को घर देने की इस योजना में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस की तैनाती सिर्फ सावधानी के लिए की गई, ताकि कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा न हो। डीडीए ने 2007 में कॉलोनी के पुनर्वास का काम शुरू किया था। प्राधिकरण ने इसकी जिम्मेदारी प्राइवेट बिल्डर को सौंपी थी, लेकिन जमीन खाली न हो पाने के कारण पुनर्निर्माण का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। क्या है योजना: कठपुतली कॉलोनी की 5.2 एकड़ जमीन पर 2800 फ्लैट बनाए जाने हैं। इसके लिए डीडीए ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल अपनाया है। मॉडल के अनुसार, जमीन के एक हिस्से पर व्यवसायिक और रिहाइशी इमारतें बनेंगी। एक फ्लैट बनाने पर करीब 15 लाख रुपये खर्च होंगे, लेकिन कठपुतली कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार से सिर्फ 1 लाख 42 हजार रुपये लेकर फ्लैट दिया जाएगा। इसमें 30 हजार रुपये की राशि मरम्मत की है, जिसके ब्याज से फ्लैटों का रखरखाव किया जाएगा। डीडीए ने इस योजना को पूरा करने के लिए 1 अप्रैल 2014 की समय-सीमा तय की थी, लेकिन कुछ समूहों के विरोध की वजह से अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। डीडीए का कहना है कि सर्वे के बाद आए परिवारों को भी फ्लैट दिया जाएगा। डीडीए ने जमीन खाली होने के बाद दो साल में सभी घरों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। योजना पर एक नजर: 2 कमरे वाले 2800 फ्लैट बनेंगे। इसके अलावा दो ओपन एयर थियेटर और स्कूल का निर्माण होगा 5.2 हेक्टेयर जमीन का 3.4 हेक्टेयर भाग कॉलोनी के पुनर्वास में इस्तेमाल होगा, शेष 1.7 हेक्टेयर जमीन पर डेवलपर व्यवसायिक और रिहाइशी निर्माण करेगा