पंचम भाव में केतु भावनात्मक संतुष्टि की कमी का संकेत देता है और यह संतान होने में समस्या या संतान और गर्भ धारण में समस्याओं को भी दर्शाता है
केतु एक क्रूर, अलगाववादी, उग्र व अग्नि तत्व प्रधान ग्रह है इसलिए पंचम भाव में केतु की स्थिति संतान संबंधी मामलों के लिए सामान्यतः उत्तम नहीं होती है. इस भाव में केतु के स्थित होने से आपकी कुछेक संतानें गर्भ में ही नष्ट हो सकती हैं या संतान उत्पन्न होने में ही अनेक बाधाएं आ सकती हैं लेकिन ये फल तभी देखने में आ सकते हैं











