#InternationalLabourDay #LabourDay #MajdoorDiwas #MajdurDiwas #MazdoorDiwas #MayDiwas 135 साल पुरानी घटना की याद में मनता है #मजदूर_दिवस https://youtu.be/7Qg_IxRHWuU https://www.instagram.com/p/COVW3q_s-8y/?igshid=1lfn7hsoeid1l
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https://youtu.be/BZYJbq4Kxxc बिहारीयों को मज़दूर कहने से पहले..इस विडियो को ध्यान से देख लीजिए। ग़लतफ़हमी दूर हो जाएगी। https://youtu.be/BZYJbq4Kxxc . . . . . . #bihar #bihariladka #majdur #majdurdiwas #majdurhorahamajbur #labourpain #thursdaypost #thursdaymorning #thursdaystyle https://www.instagram.com/p/CIUa0OnpriL/?igshid=8oj7lhlw6eb3
मजदूर दिवस 2020: जानें क्यों मनाया जाता है यह दिवस, क्या है इसका इतिहास, महत्व और मनाने का तरीका
चैतन्य भारत न्यूज हर साल 1 मई को 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस' (International Labour Day) मनाया जाता है। इसको अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, श्रम दिवस या मई दिवस भी कहते हैं| यह दिवस उन लोगों के नाम समर्पित है जिन्होंने अपने खून पसीने से देश और दुनिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को उनका सम्मान और हक दिलाना है। कैसे और क्यों हुई शुरुआत इस दिवस को मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर निश्चय किया कि वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे। जिसके बाद 1 मई 1886 को पूरे अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल की। इस हड़ताल में लगभग 11 हजार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हजार मजदूर शामिल हुए। हड़ताल के दौरान एक व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और प्रदर्शनस्थल पर अफरातफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोलियां चलाई। गोलीबारी में कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें यह ऐलान किया गया कि 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। जिसके बाद पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत हुई। तब से ही दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा। भारत में मजदूर दिवस का इतिहास भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को हुई थी। इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने की थी। भारत में मद्रास हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया गया और एक संकल्प पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी मजदूर दिवस के तौर पर मनाया जाए और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाए। उस समय भारत में मजदूरों की जंग लड़ने के लिए कई नेता सामने आए जिनमें बड़ा नाम दत्तात्रेय नारायण सामंत उर्फ डॉक्टर साहेब और जॉर्ज फर्नांडिस का था। Read the full article
मजदूर दिवस 2020: जानें क्यों मनाया जाता है यह दिवस, क्या है इसका इतिहास, महत्व और मनाने का तरीका
चैतन्य भारत न्यूज हर साल 1 मई को 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस' (International Labour Day) मनाया जाता है। इसको अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, श्रम दिवस या मई दिवस भी कहते हैं| यह दिवस उन लोगों के नाम समर्पित है जिन्होंने अपने खून पसीने से देश और दुनिया के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को उनका सम्मान और हक दिलाना है। कैसे और क्यों हुई शुरुआत इस दिवस को मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को अमेरिका में एक आंदोलन से हुई थी। अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर निश्चय किया कि वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे। जिसके बाद 1 मई 1886 को पूरे अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल की। इस हड़ताल में लगभग 11 हजार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हजार मजदूर शामिल हुए। हड़ताल के दौरान एक व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और प्रदर्शनस्थल पर अफरातफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोलियां चलाई। गोलीबारी में कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की दूसरी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें यह ऐलान किया गया कि 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा। जिसके बाद पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत हुई। तब से ही दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा। भारत में मजदूर दिवस का इतिहास भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को हुई थी। इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने की थी। भारत में मद्रास हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया गया और एक संकल्प पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी मजदूर दिवस के तौर पर मनाया जाए और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाए। उस समय भारत में मजदूरों की जंग लड़ने के लिए कई नेता सामने आए जिनमें बड़ा नाम दत्तात्रेय नारायण सामंत उर्फ डॉक्टर साहेब और जॉर्ज फर्नांडिस का था। Read the full article