सीपीसी में डिक्री के निष्पादन से क्या अभिप्राय है | Mode Of Execution Order 21 Rule 26 To 36
डिक्री के निष्पादन के तरीके क्या है सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 21 के नियम 30 से 57 तक में डिक्री के निष्पादन की रीतियों (modes of execution) का उल्लेख किया गया है। भिन्न - भिन्न प्रकार के मामलों में पारित डिक्रियों के निष्पादन की रीतियाँ भिन्न - भिन्न होती है| (1) धन के संदाय के लिए डिक्री - धन के संदाय के लिए प्रत्येक डिक्री का निष्पादन किसी अन्य डिक्री के वैकल्पिक रूप में धन के संदाय को सम्मिलित करते हुए निम्नांकित रीतियों से किया जा सकता है - (क) निर्णीत ऋणी के सिविल कारावास में निरोध के द्वारा, या (ख) निर्णीत ऋणी की सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा, या (ग) दोनों के द्वारा। (आदेश 21 नियम 30) यह भी जाने - सेशन न्यायालय के समक्ष अपराधों के विचारण की प्रक्रिया | Sec. 225 to 237 CrPCधन के संदाय की डिक्री के निष्पादन में गिरफ्तारी और निरोध का आदेश देने से पूर्व न्यायालय द्वारा निर्णीत ऋणी को हेतु संदर्शित करने की सूचना दी जायेगी। जी. प्रभातभाई नाथाभाई बनाम पण्ड्या अरविन्द कुमार अम्बालाल (ए. आई. आर. 1987 गुजरात 160) – इस मामले में यह कहा गया है कि - धन के संदाय की डिक्री के निष्पादन में धन का संदाय नहीं किये जाने पर निर्णीत ऋणी को तभी गिरफ्तार एवं निरुद्ध किया जा सकेगा जब डिक्री धारक द्वारा यह साबित कर दिया जायेगा कि - (क) निर्णीत ऋणी के पास डिक्री की राशि का संदाय करने के पर्याप्त साधन है, और (ख) वह दुर्भावनावश धन का संदाय नहीं करना चाहता है। (2) विनिर्दिष्ट चल सम्पत्ति के लिए डिक्री - संहिता के आदेश 21 नियम 31(1) में किसी विनिर्दिष्ट चल सम्पत्ति के लिए पारित डिक्री के निष्पादन की रीतियों का उल्लेख किया गया है। ऐसी डिक्री का निष्पादन निम्नांकित रीतियों से किया जा सकेगा - (क) अभिग्रहण ( seizure) द्वारा अर्थात् यदि चल वस्तु या अंश का अभिग्रहण साध्य हो तो ऐसी वस्तु या अंश के अभिग्रहण द्वारा, (ख) निरोध (detertion) द्वारा अर्थात् निर्णीत ऋणी के सिविल कारावास में निरोध द्वारा, (ग) कुर्की (attachment) द्वारा अथवा (घ) दोनों के द्वारा अर्थात् निर्णीत ऋणी के निरोध एवं उसकी सम्पत्ति की कुर्की के द्वारा। यदि ऐसी कुर्की तीन माह तक प्रवृत्त (in force) रह जाती है और निर्णीत ऋणी द्वारा डिक्री का पालन नहीं किया जाता है तब ऐसी कुर्क की गई सम्पत्ति को डिक्रीधारक के आवेदन पर बेचा जा सकेगा और उससे प्राप्त राशि में से वह राशि, जो चल सम्पत्ति के एवज में निर्धारित की गई है, डिक्रीधारक को संदत की जायेगी तथा शेष राशि निर्णीत ऋणी को लौटा दी जायेगी। (नियम 31 उप नियम 2) उप नियम 3 में यह कहा गया है कि यदि - (क) निर्णीत ऋणी द्वारा डिक्री का पालन कर दिया जाता है, (ख) सभी खर्चे का भुगतान कर दिया जाता है, या (ग) कुर्की के तीन माह समाप्त होने पर सम्पत्ति के विक्रय के लिए आवेदन नहीं किया जाता है, या (घ) आवेदन किया जाता है लेकिन वह खारिज कर दिया गया है तब ऐसी कुर्की विरत अर्थात् समाप्त (cease) हो जायेगी। Read More This Post - Mode Of Execution - निष्पादन की रीति Read the full article










