देह चोला है ......!! कहानी (प्रो. परिमाला अंबेकर)
देह चोला है ……!! कहानी (प्रो. परिमाला अंबेकर)
अदृश्य वस्त्र की कल्पना से इतिहास ने अपनी गलती को ढांक लिया था । सभा में घसीटी गयी द्रौपदी का मान बचा लिया था अदृश्य हाथों से निकलती हुई वस्त्र की धारा ने । मान उतारते हाथ तो थक गये थे लेकिन वस्त्र का बहना नहीं रूका था । लेकिन आज, अनगिनत असंख्य मोबाइलों में, बिना घसीटे गये ही , निर्वस्त्र…. यूटयूब में कैद हो गयी थी भारती। निर्वस्त्र देह पर चढाने के लिये… वस्त्र ;कफन देने वाले अदृश्य हाथों की तलाश…
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