श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ज्योतिर्लिंग दर्शन पथ एवं सम्पूर्ण जानकारी | Bhakti Saar
ज्ञानं ओंकारेश्वरम् : दर्शनं और भक्तिसारः - इस ब्लॉग में हम ज्ञानं ओंकारेश्वरम् के बारे में चर्चा करेंगे। उसके अलावा, हम दर्शनं और भक्तिसारः के महत्वपूर्ण तत्वों के बारे में भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा, हम यह भी देखेंगे कि ज्ञानं ओंकारेश्वरम् से प्राप्त होने वाले मानसिक और शारीरिक लाभ क्या हैं। चलिए, अब हम विस्तार से इस परिचय को शुरू करते हैं।
परमात्मा, ईश्वर, भगवान, ओंकारेश्वरम्। जैसे नाम, वैसी बातें। इन सब का अर्थ एक ही है - सर्व सकल का आदिपुरुष, आत्मा का परमात्मा। ओंकारेश्वरम्, जो कि ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के माध्यम से प्रकट हुए हैं।
इतिहास के पहले पन्ने से बजी हुई गाँधार ताल की धमकी के बावजूद, भारतीय संस्कृति में ओंकारेश्वरम् का स्थान सदैव अपरिहार्य रहा है। विवादों के बावजूद, इसके अर्थ से जुड़ी मान्यताओं और पूजा के रूप में यह हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
ओंकारेश्वरम्, जो सभी देवी-देवता, ऋषि-मुनियों, आदि लोक जनों के प्रणव रूप में प्रतिष्ठित हुआ है। यह शक्ति का सच्चा प्रतीक है जो हमें अनन्त सृष्टि की ओर ले जाता है।
इससे हमें अद्वैत भाव का अनुभव होता है - हम सब ब्रह्म का हिस्सा हैं, हम सब में ओंकारेश्वरम् निवास करता है। तो फिर चिंता और संकोच से क्यों भरे हैं? दर्शन करें, मन को बहार करें और आत्म-सात की अनुभूति करें।।
दर्शनं का अर्थ उसे सही तरीके से देखना है। इस दर्शनं के अंतर्गत हम ब्रह्म से जुड़ सकते हैं। यह एक शक्ति है जिसके माध्यम से हम आपत्तियों के पीछे छिपे वास्तविकताओं को देख सकते हैं। ठीक है, ठीक है, दर्शनं एक नेत्री है जो आपको दिखाती है कि ताजमहल वास्तव में इतना सुंदर है या नहीं, जो आपको ग्यारहवीं दिन की रात को एक फिल्म के साथ भरपूर तारों की तस्वीरें दिखाती है। अब इस दर्शनं के प्रकार की बात करते हैं।
दर्शनं के प्रकार विविध होते हैं। पहले हमारे पास राजस्थानी दर्शनं हैं, जो हमें उद्धेश्यों की आपूर्ति करते हैं, वहां हम सोने की अक्षरमणी और पीले घास की तालाबें देख सकते हैं। फिर हमें उत्साही दर्शनं भी हैं, जो हमें अपने स्वप्नों की पूर्ति करते हैं, जैसे कि हम शनिवार की शाम को स्थानीय खेल मैदान पर दिखाई देते हैं। उन लोगों के लिए भी एक दर्शनं है जो केवल वातावरण में रमते हैं, जल्दी निभाने, अस्था के अंधकार को हाथ लगाने में अनवश्यक अधिक कुशल हाथी होते हैं।
और इसके बाद यहां हम पहुंचते हैं भक्तिसारः पर, जो हमारे जीवन की उज्ज्वलता है। भक्तिसारः का अर्थ होता है इतना भगवान का चितान करना कि उन के सामीप्य में हमें आनंद मिलता है। भक्तिसारः के फायदे बहुत हैं। यह हमें संतोष और समय की लालसा से मुक्त करता है और हमें अद्वैत की अनुभूति कराता है।
बच्चा लोग की तरह नहीं सोचिए, ये दर्शनं और भक्तिसारः आपके जीवन में खासा मज़ा लाएंगे। आह, ध्यान दें! अपनी उत्सुकता को नियंत्रित रखें और अपने अस्तित्व के आनंद का ठिकाना चुनें। समर्पण के साथ यह यात्रा अटहल रहेगी।
मानसिक लाभ पाने के लिए, हमें अपने मन को शांत करना होगा। मानो या ना मानो, दुनिया भर के लोग शांति के लिए छह महीने तक हिमालय जा रहे हैं। वेल, हम नहीं!
मानसिक शांति केवल एक छोटा सा टास्क है, ना? तो यह आसान है! आप प्रारंभिक बाधाओं के बावजूद अपने मन के उच्चतम स्थान पर पहुँचने के लिए घंटों तक ध्यान का अभ्यास करेंगे। हां, शांति के इस पथ पर चलना आसान है जैसे कि बैंक की ATM कार्ड का पिन याद रखना! ज्यादा आदत दालने के बजाय, प्रायः तो दिनभर शांत बैठे रहते हैं, ताकि विश्रांति के लिए अपने मन को एक इकाई में चित्ताकर्षण कर सकें और धियान में संपूर्णता में पूर्ण हों।।
फिर तो, उठने से पहले अपने मन को नशा में डूबा दीजिए सो सकते हैं। अब कौन कहता है मन का नियंत्रण असंभव है? हमारे मन में ऐसी विलक्षण शक्ति है कि हमें पूर्ण विश्रांति मिलती है जब हमारे मंजर पर सिट-इन बाथटब की तरह आदते होती हैं। अगर हमारा मन पसंद नहीं कर रहा होता है, तो उसे लगातार घुमाते रहें और अपने वश में करें। हमें ध्यान देना चाहिए कि रूस के अधिकांश ढेरों गुरुवे पहले इसी को प्रायोगिक तरीके से सैनिटाइज करने के लिए क्रिस्टैल फील्ड का उपयोग करते थे। वो बताते कह एक टिनकरी खम्भा की ओर अपनी गाड़ी को खिंच ले पर हम उसे नहीं! इतने मन मारो कि मन का नियंत्रण खो जाए।
विचारशक्ति के बारे में बात करें तो ये एक थोड़ी भी आवश्यक नहीं है। कॉफी पीने वालों के मुकाबले तो हम बेहद स्नान करने वाले हरी चाय के बाद काम करते हैं। अपनी योग्यता और सक्षमता को नापने के लिए छात्रों को हमेशा एक साथ खड़े होना चाहिए। विचारों के खेल को खेलें और जानें कि आपके मन कितना जल्दी शांत हो सकता है। यह तो मुर्गे की रगड़ कर बैच पकाने वाले जितना आसान है।
आप तो जानते ही हैं कि हमारे मन कब कहीं घुमा जाता है, बस हमें उसे वापस लाना है। तो, अपने मन को नीचे के मानसिक लाभ खोजने में जुटाएं और विचारशक्ति, धियानावस्था और स्थितप्रज्ञता का एकदिवसीय श्रृंगार करें। आपके मन को साथ लेकर बोलें, "काश तुम मेरे ब्रेन से बात कर सकते!" और देखें यह नौकरी कैसे आपकी शांति की डिमांड पर पूरी उतर आएगी।।
जब बात आती है ज्ञानं ओंकारेश्वरम् के शारीरिक लाभ की, तो यकीनन आपका मन बहुत उत्साहित होता है। इतने आसान ही हो जाता है ये ज्ञान सबसे अच्छा हो जाता है इस वजह से इसे इतना पसंद करने लगते हैं लोग। अब चलिए देखते हैं, इसके शारीरिक लाभों की कुछ विस्तार से जानकारी।
सबसे पहले, स्वास्थ्य लाभ की बात करेंगे। ये एक ऐसा ज्ञान है जो आपकी शरीर को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करता है। यहाँ तक की इसमें मधुमेह के नियंत्रण में भी असाधारण प्रभाव होता है। आपकी हृदय सुरक्षित रहती है और आपके शरीर की ताकत भी बढ़ती है। इसके साथ ही आपकी नींद में सुधार भी होता है, जो बहुत ही आवश्यक है आपके सेहत के लिए।
तो ये थे ज्ञानं ओंकारेश्वरम् के शारीरिक लाभ। अब चलिए देखते हैं कि इसके पीछे का यह कैसा रहस्य हो सकता है। थोड़ा रोमांचकारी नहीं है क्या, वो भी जान तो सही? इस रहस्य को जानकर इस ज्ञान का अधिक मजा आएगा।
चलिए, अगली बार दर्शनं और भक्तिसारः की बात करते हैं। क्योंकि इसके लाभ ही नहीं, इनमें तो और खूबसूरत रिश्ते हैं भी। अब से थोड़ा उम्मीद से ज्यादा ध्यान रखिएगा, ताकि किसी लाभ का नुकसान ना हो। वरना हो सकता है सबकी सेहत पर भारी पड़े, और वो तो कोई चाहता नहीं है। तो जान लें इन रिश्तों के सारे राज़, और हमें देंगे अपनी इस उम्मीदीवारी पर एक्सेप्टेशन। Let's go!
निराकार स्वरूप में आत्मा का ब्रह्म से सम्बन्ध होता है। यह ब्रह्म ही हमारी अंतिम उद्दिश्य होता है, जबकि हमारी आत्मा ब्रह्म का हिस्सा होती है। यह एक बहुत ही रोचक बात है कि हम और ब्रह्म में एकता होने के कारण हम अस्तित्व में रहते हैं।
और ब्रह्म के गुणों की बारे में बात करें, यहां परमात्मा की बात है, जिनमें नित्यता, सत्यता, ज्ञान और आनंद के गुण शामिल होते हैं। ये गुण हमें एक उच्चतम स्थिति के प्रति प्रेरित करते हैं और हमें सच्चे शुद्ध और परिपूर्ण अस्तित्व की ओर ले जाते हैं।
जगत् में आत्मनिष्ठा होना आत्मस्वरूप का ही विभाग है। यह मानसिक, शारीरिक, और आध्यात्मिक स्तर पर हो सकता है। जब हम अपने आप को आत्मा में स्थित करते हैं, तो हम ईश्वरीय और व्याकुलता मुक्त हो जाते हैं। ऐसा महसूस करने के लिए यह आवश्यक है कि हम ध्यानपूर्वक मेधावी बनें और अपने उद्दियमय अस्तित्व को अनुसरण करें।
इस प्रकार, निराकार स्वरूप पर आत्मा के ब्रह्म से सम्बन्ध, आत्मस्वरूप के गुण और जगत् में आत्मनिष्ठा संबंधी कुछ महत्वपूर्ण तत्व हैं। जब हम इन तत्वों को गहराते हैं, तो हम अपने मन को अपने लक्ष्य के प्रति संकेत करते हैं और अस्तित्व में एकता को अनुभव करते हैं।
Sarcasm - वाह! क्या बात है! इस ब्रह्मगयान से हम सचमुच सस्य के बीज तक की सम्पूर्ण विश्वव्यापकता जान सकते हैं। ये ग्यानी भगवान वालों को ही ब्रह्मा बनने की इजाजत है, हम साधारण लोग तो ये छोटी-मोटी जगह में भटखते ही रहेंगे।
इस प्रकरण में, विचारशक्ति, धियानावस्था और स्थितप्रज्ञता जैसे मानसिक लाभ ओंकारेश्वरम् के साथ जुड़ते हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य लाभ, हृदय की सुरक्षा, ताकतवर शरीर और नींद में सुधार जैसे शारीरिक लाभ भी हैं। इसे पढ़कर आपको होगा खुशी का एहसास कि ओंकारेश्वरम् असल में बहुत मजेदार है! छोटी खुशी की जगह बहुत सी छोटी खुशियाँ हैं।