पौष पूर्णिमा पर भक्तों को मिला गुरु दर्शन का सौभाग्य
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पौष पूर्णिमा पर भक्तों को मिला गुरु दर्शन का सौभाग्य
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Festival Spotlight: "Paush Purnima – The Day of Purification"
Paush Purnima marks an auspicious day of purification, devotion, and spiritual discipline. This sacred full-moon day is known for holy snan, offering prayers, and beginning important spiritual practices.
kathasangam Eternal Tales of Sanatan Dharma Myths, Legends & Wisdom know your dharma , follow your dharma Our narratives “Our Narratives are
Book Paush Purnima Puja From Pujaabhishekam
It is also one of significant day for Hindus as it is celebrated all over the country by fasting, worshipping and conducting the Satyanarayan Katha. Taking a bath in the holy water at a Hindu pilgrimage place on this auspicious day rids a person of all their sins and helps them attain “Moksha.”. It is believed that for all the sins one has committed in his past lives and be entitled to salvation.
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Shakambhari Purnima or Paush Purnima on 17 January 2022
Shakambhari Purnima is observed in Paush month. The festivity is dedicated to goddess Shakambhari who is said to bless her devotees with peace and prosperity.
पौष पूर्णिमा आज, इस व्रत को करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति, जानिए पूजा विधि
चैतन्य भारत न्यूज हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। वहीं पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इस बार पौष पूर्णिमा 27 जनवरी को है। आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा का महत्व और पूजा-विधि। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
पौष पूर्णिमा का महत्व हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। कहा जाता है कि इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के बाद इस दिन दान करने की भी परंपरा है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
इस बार पौष पूर्णिमा पर ग्रहों का क्या संयोग होगा? सूर्य, शनि, बृहस्पति और शुक्र का संयोग होगा। गुरु, मंगल और चन्द्रमा का अद्भुत केंद्रीय संबंध बना रहेगा। इसके कारण अमृत वर्षा होगी और पवित्रता बनी रहेगी। इस दिन दुर्लभ गुरु पुष्य नक्षत्र भी रहेगा। इस बार के स्नान से मुक्ति और मोक्ष की सम्भावना काफी ज्यादा बनेगी। पौष पूर्णिमा पूजन-विधि पौष पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। संभव हो तो इस दिन तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करें। स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से दें। Read the full article
पौष पूर्णिमा आज, इस व्रत को करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति, जानिए पूजा विधि
चैतन्य भारत न्यूज हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। वहीं पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इस बार पौष पूर्णिमा 27 जनवरी को है। आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा का महत्व और पूजा-विधि। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
पौष पूर्णिमा का महत्व हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। कहा जाता है कि इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के बाद इस दिन दान करने की भी परंपरा है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
इस बार पौष पूर्णिमा पर ग्रहों का क्या संयोग होगा? सूर्य, शनि, बृहस्पति और शुक्र का संयोग होगा। गुरु, मंगल और चन्द्रमा का अद्भुत केंद्रीय संबंध बना रहेगा। इसके कारण अमृत वर्षा होगी और पवित्रता बनी रहेगी। इस दिन दुर्लभ गुरु पुष्य नक्षत्र भी रहेगा। इस बार के स्नान से मुक्ति और मोक्ष की सम्भावना काफी ज्यादा बनेगी। पौष पूर्णिमा पूजन-विधि पौष पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। संभव हो तो इस दिन तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करें। स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से दें। Read the full article
इस बार पौष पूर्णिमा के महास्नान पर बन रहा यह अद्भुत संयोग
चैतन्य भारत न्यूज हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। वहीं पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इस बार पौष पूर्णिमा 27 जनवरी को है। आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा का महत्व और पूजा-विधि। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({});
पौष पूर्णिमा का महत्व हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। कहा जाता है कि इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। स्नान के बाद इस दिन दान करने की भी परंपरा है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
इस बार पौष पूर्णिमा पर ग्रहों का क्या संयोग होगा? सूर्य, शनि, बृहस्पति और शुक्र का संयोग होगा। गुरु, मंगल और चन्द्रमा का अद्भुत केंद्रीय संबंध बना रहेगा। इसके कारण अमृत वर्षा होगी और पवित्रता बनी रहेगी। इस दिन दुर्लभ गुरु पुष्य नक्षत्र भी रहेगा। इस बार के स्नान से मुक्ति और मोक्ष की सम्भावना काफी ज्यादा बनेगी। पौष पूर्णिमा पूजन-विधि पौष पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। संभव हो तो इस दिन तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान करें। स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें। दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र विशेष रूप से दें। Read the full article
पौष पूर्णिमा चुपचाप यहां जला दे 1 दीपक इतना पैसा आएगा कि संभाल नहीं पाओग...