सफ़ेद घोड़ा और एक राजकुमार
सफ़ेद घोड़े और एक राजकुमार, देखे नहीं हकीकत में
बस देखा उन्हें नानी वाली कहानियों में,
की आते थे राजकुमार सफ़ेद घोड़ो पर, ले जाते थे राजकुमारी को उठा घोड़ो पर, दे जाते थे, रोशनी नए ख्वाबो में,
तो भर जाते थे, रंग बेजान पड़ी रातो में,
कितनी चैन की नींद निकल गयी सोने में
लिए ख्वाब, कही दिल के कोनो में, एक दिन ऐसा आएगा, सफ़ेद घोड़े पर बैठ कर राजकुमार घर आएगा, सारी सुनी हुई कहानिया हकीकत में चलेगी
सच में राजकुमार होते हैं, यह बात पता चलेगी,
पर, कहानिया बस कहानिया होती है
हकीकत मैं कहा मिलते समुन्दर में चमकते मोती है, न कोई तारा टुटा था कलतक
न ही कोइ खिलौना रूठा आजतक
कितने सफ़ेद घोड़े देखे
पर एक पर भी राजकुमार कभी नही, बैठे,
एक दिन कोई आएगा जरुर, संग उसके माँ बाप लाएगा ११ रूपए, एक साडी एक नारियल, दे कर हाथ में, रिश्ता पक्का कर जाएगा, लेकर रोका, अगले महीने फिर बारात ले आएगा, लड़की को बीबी बना संग ले जाएगा, एक दिन बो भी आया, सच मैं एक लड़का घोड़ी पर चड़कर उसे लेने आया, न घोड़ी का रंग सफ़ेद था
न वो राजकुमार के बेष मैं था, सब कुछ ऐसा ही होता हैं
जितने मुंह उतनी कहानिया होटी हैं,
नानी सुनाती थी, उसे हरदम, राजा-रानी की कहानी
जब-जब ऊब जाती वो गुडिया रानी
या बिलखती किसी और ख्वाब के लिए
नानी सुना देती सफ़ेद घोड़े और राजकुमार की कहानी, आज पाता चला सब कुछ कहानी होती हैं, बचपन की गुड़िया, सफ़ेद घोडा, वो राजकुमार
कुछ भी हकीकत मैं नहीं, बस कुछ लोगो की मुँह जुबानी ही होती हैं |
आरिन :)













