हमारा गाँव सेमरी ज़्यादा बड़ा नहीं है।करीब 70–80 घर होंगे।खेती, मवेशी, शाम को चौपाल—बस इतना ही जीवन है।मैं महेश हूँ।उम्र 38 साल।गाँव में ही किराना की छोटी दुकान चलाता हूँ।ज्यादातर बातें मैं बढ़ा-चढ़ाकर नहीं करता, क्योंकि गाँव में बात फैलते देर नहीं लगती।ये सब शुरू हुआ पिछले साल, जब रमेश की शादी हुई।रमेश मेरे घर के सामने रहता है।सीधा लड़का, थोड़ा कम बोलने वाला।उसकी शादी पास के इलाके से तय हुई थी।लड़की का नाम सबको बाद में पता चला, पहले कोई खास चर्चा नहीं थी।शादी के दिन सब कुछ सामान्य था।लड़की सुंदर थी—इतना जरूर कहूँगा।पर एक बात मैंने नोटिस की थी, जिसे मैंने उसी वक्त नजरअंदाज कर दिया।