‘मैं आदिम भूख हूं बेटी, मुझे पहचान रही हो? दुर्भिक्ष में चूल्हा फ़कीर की एक आंख सा धंसा जांचता है गौर से मुझको, हंसता है! और अट्टहास की तरह फैल जाती हूं मैं हर तरफ़’ - टोकरी में दिगंत . शुभकामनाएँ, अनामिका जी. यह तस्वीर, जिसमें मैं मंत्रमुग्ध, स्त्री विमर्श पर अनामिका जी को सुन रहा हूँ, हमारी (मेरी और @authorchanchal) की दूसरी पुस्तक #KhultiGirahein के लोकार्पण के अवसर की है! @rajkamalbooks @satya.nirupam #TokriMeinDigant #साहित्य #SahityaAkademi #sahityaacademyaward https://www.instagram.com/p/CMWAFWZsPXk/?igshid=vfjjc6g7togj













