My 1st Ever Poetry in Hindi-
यूं तो ख्वाब देखे थे मैंने कई,
यूं तो ख्वाब देखे थे मैंने कई
यूं तो ख्वाब देखे थे मैंने कई
रहा तो करीब तू मेरे हर पल,
रहा तो करीब तू मेरे हर पल,
पर मेरे करीब होते हुए भी,
यूं तो ख्वाब देखे थे मैंने कई पर वो एक ख्वाब
जो कभी मुकम्मल ना हो सका।
रहा तो मेरे तू हर पल करीब,
हां जानता हूं ये बात मैं बखूबी
हां जानता हूं ये बात मैं बखूबी
कि इल्म तुझको भी है इस बात का
कि इल्म तुझको भी है इस बात का
कि इश्क तुझसे बेशुमार है मुझको,
पर फिर भी अफसोस रहेगा मुझे इस बात का
पर फिर भी अफसोस रहेगा मुझे इस बात का,
कि तेरा दिल कभी मेरा तलबगार ना हो सका।
यूं तो सुने थे मैंने किस्सा-ऐ-उल्फत के हज़ार
यूं तो सुने थे मैंने किस्सा-ऐ-उल्फत के हज़ार
पर फिर भी आज भी मैं कहता हूं तुझसे ये
पर फिर भी आज भी कहता हूं मैं तुझसे ये
कि तुझसे एक बिछड़ जाने पर
पर सिर्फ एक तुझसे बिछड़ जाने पर
यूं तो देखे थे ख्वाब मैंने कई पर वो एक ख्वाब
जो कभी मुकम्मल ना हो सका।
हां पर एक बात बता दूं मैं तुझे आज फिर से
हां पर एक बात बता दूं तुझे आज मैं फिर से कि
"मोहब्बत जब भी होगी तुझी से होगी,
कि मोहब्बत जब भी होगी तुझी से होगी,
हर बार होगी और बार-बार होगी"
बस यही एक ऐसा किस्सा है मेरी जिंदगी का
बस यही एक ऐसा किस्सा है मेरी जिंदगी का
जो मुझसे कभी खत्म ना हो सका।
यूं तो देखे ख्वाब मैंने कई पर वो एक ख्वाब
रहा तो तू करीब मेरे हर पल
पर करीब रहते हुए भी कभी मेरा ना हो सका।
हां गुमान रहेगा मुझे तेरे साथ बिताए हुए हर पल पर
हां गुमान रहेगा मुझे तेरे साथ बिताए हुए हर पल पर ताउम्र
क्योंकि यूं तो फैला हुआ है बेवफाई का मंजर
क्योंकि यूं तो फैला हुआ है यहां
पर इस बेवफाई के दौर में भी
दोस्त तो हज़ार मिले मुझको हमदर्द भी मिले मुझको
दोस्त तो हज़ार मिले मुझको हमदर्द भी मिले मुझको
पर तुझ जैसा कोई मेरा हमसफर ना हो सका।
पर अब कोई गिला शिकवा कोई शिकायत नहीं है तुझसे
पर अब कोई गिला शिकवा कोई शिकायत नहीं है तुझसे
क्योंकि सारी गलतियां तेरी तो नहीं थी उसमें
एक गफलत तो मेरी भी रही है।
तेरे साथ रहा तेरे साथ बिताया हर पल मैंने हर वक्त
पर साथ रहते हुए भी मुझसे कभी
इज़हार-ऐ-मोहब्बत ना हो सका।
यूं तो देखे थे ख्वाब मैंने बहुत कई पर वो एक ख्वाब
जो कभी मुकम्मल ना हो सका।
रहा तो मेरे तू हर पल करीब पर करीब रहते हुए भी
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