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मोक्ष.........
मोक्ष.........
मोक्ष.........
आज सुबह "morning walk" पर,
एक व्यक्ति को देखा।
मुझ से आधा "किलोमीटर" आगे था।
अंदाज़ा लगाया कि, मुझ से थोड़ा "धीरे" ही भाग रहा था। एक अजीब सी "खुशी" मिली। मैं पकड़ लूंगा उसे, और यकीन भी।
मैं तेज़ और तेज़ चलने लगा ,आगे बढ़ते हर कदम के साथ,मैं उसके "करीब" पहुंच रहा था.कुछ ही पलों में, मैं उससे बस सौ क़दम पीछे था.
निर्णय ले लिया था कि, मुझे उसे "पीछे" छोड़ना है। थोड़ी "गति" बढ़ाई।
अंततः कर दिया।
उसके पास पहुंच, उससे "आगे" निकल गया.
"आंतरिक हर्ष" की "अनुभूति",
कि, मैंने उसे "हरा" दिया।
बेशक उसे नहीं पता था,
कि हम "दौड़" लगा रहे थे।
मैं जब उससे "आगे" निकल गया
अनुभव हुआ
कि दिलो-दिमाग "प्रतिस्पर्धा"पर, इस कद्र केंद्रित था.......
कि
"घर का मोड़" छूट गया,
मन का "सकून" खो गया,
आस-पास की "खूबसूरती और हरियाली" नहीं देख पाया
अच्छा मौसम की "खुशी" को भूल गया
और
तब "समझ" में आया,
यही तो होता है "जीवन" में,भी है
जब हम अपने साथियों को,
पड़ोसियों को, दोस्तों को,
परिवार के सदस्यों को,
"प्रतियोगी" समझते हैं।
उनसे "बेहतर" करना चाहते हैं।
"प्रमाणित" करना चाहते हैं
कि, हम उनसे अधिक "सफल" हैं।
या
अधिक "महत्वपूर्ण"।
बहुत "महंगा" पड़ता है।
क्योंकि अपनी "खुशी भूल" जाते हैं।
अपना "समय" और "ऊर्जा,
उनके "पीछे भागने" में गवां देते हैं।
इस सब में, अपना "मार्ग और मंज़िल" भूल जाते हैं।
"भूल" जाते हैं कि, "नकारात्मक प्रतिस्पर्धाएं" कभी ख़त्म नहीं होंगी।
"हमेशा" कोई आगे होगा।
किसी के पास "बेहतर नौकरी" होगी।
"बेहतर गाड़ी",
बैंक में अधिक "रुपए",
ज़्यादा पढ़ाई,
"सुन्दर पत्नी”
ज़्यादा संस्कारी बच्चे,
बेहतर "परिस्थितियां"
और बेहतर "हालात"।
इस सब में एक "एहसास" ज़रूरी है
कि, बिना प्रतियोगिता किए, हर इंसान "श्रेष्ठतम" हो सकता है।
कुछ "असुरक्षित" महसूस करते हैं क्योंकि, अत्याधिक ध्यान देते हैं "दूसरों" पर -
कहां जा रहे हैं?
क्या कर रहे हैं?
क्या पहन रहे हैं?
क्या बातें कर रहे हैं?
"जो है, उसी में❤️ खुश रहे"।
लंबाई, वज़न या व्यक्तित्व...।
"स्वीकार" करे और "समझे"
कि, कितने भाग्यशाली है।
ध्यान नियंत्रित रखे।
स्वस्थ, सुखद ज़िन्दगी जीये।
"भाग्य" में कोई "प्रतिस्पर्धा" नहीं है।
सबका अपना-अपना है।
"तुलना और प्रतियोगिता" हर खुशी को चुरा लेते हैं।
इस लिए अपनी "दौड़" खुद लगायें, बिना किसी प्रतिस्पर्धा के, इससे असीम सुख आनंद मिलता है, मन में विकार नही पैदा होते, शायद इसी को "मोक्ष" कहते है।
🤭🤭🤭🤭🤭🤭
*कुछ नया सीखने के लिए* *यह स्वीकार करना जरूरी है कि* *हर व्यक्ति* *किसी न किसी बात में* *हमसे बेहतर होता है.....!* #therravindrakumar (at Lake Palace Udipur) https://www.instagram.com/p/CcY2krlhqH3/?igshid=NGJjMDIxMWI=
*📌 *When you do something noble and beautiful and nobody noticed, do not be sad. For the sun every morning is a beautiful spectacle, and yet most of the audience still sleeps.* #therravindrakumar (at Ahmedabad, India) https://www.instagram.com/p/CcRuk-Mpw4u/?igshid=NGJjMDIxMWI=
*क्या आप जानते हैं कि* *ज्योतिषी कौन होता है*- आपका ज्योतिषी वह शख्स है जो आपको हारने नही देता। आपका ज्योतिषी वह शख्स है जो मरते हुए इंसान के लिए अमृत की एक बूंद के समान है। आपका ज्योतिषी वह शख्स है जो आपके बुरे समय को धीरे-धीरे कटवाता है। आपका ज्योतिषी वह शख्स है जो बताता है कि चिंता ना कर मै तेरे साथ हूँ। ईश्वर तेरे साथ है तेरा समय भी आएगा। आपका ज्योतिषी वह शख्स है जो आपके अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को निकाल कर खुद अपने अंदर लेता है और बदले में आपको सकारात्मक ऊर्जा से लबालब भर देता है। ज्योतिषी आम इंसान का विश्वास है। यही आम इंसान ज्योतिषी के सहारे उसके द्वारा दिखाये जीवन पथ का अनुसरण करते हुये अपनी व अपने परिवार की जिंदगी को खुशहाल बनाता है। ज्योतिषी का प्रमुख कार्य दूसरे को सुख पहुचाने का है, न कि सिर्फ खुद को सुखी करना। ज्योतिष विद्या को ईश्वर द्वारा रचित इस संसार के माया-मोह से भरे अंधकार में ईश्वर प्रदत्त ज्योति बोला गया है। ज्योतिषी को अपनी राय की फीस लेनी चाहिये क्योंकि यह उसका काम है। आपके द्वारा दिये गये उसी पारिश्रमिक से ज्योतिषी अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। अपने कार्य की कीमत लेना ज्योतिषी का हक है। ज्योतिषी के पास सदैव श्रद्धा विस्वास के साथ अपने प्रश्न रखना चाहिए तभी उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है । ज्योतिषी के पास कदापि परीक्षा भाव से जाकर अपने प्रश्न न रखे अन्यथा पतन का रास्ता खुल सकता है । ज्योतिषी का पहले फल, फूल और द्रव्य से सम्मान करें फिर अपने प्रश्न रखने से कार्य की अनुकूलता रहती है । ज्योतिषी से कभी भी अपने पद, प्रभाव का उपयोग कर दबाब बनाकर कोई भी काम न करवाये अन्यथा अनिष्ट की संभावना रहती है । सही मायने के जिसको इस प्रकार के उपायों की जरूरत है तो ही उपाय स्वयं करने के लिये जातक को प्रेरित करे एवम पंच महाभूतो के अनूकूलन के लिये जीव जन्तु पे दया भोजन पर्यावरण अनूकूलन दान बताना उसका धर्म है। मेरी माँ से प्रार्थना है कि माँ शारदे सदा अपनी सही दृष्टि ज्योतिषियों पर बना कर रखे। जिससे हम समाज को सही राह देने वाले, गलती से भी गलत राह पर ना चल सके। जय श्री कृष्णा #ocultofutopiasmasterofpossibilities #therravindrakumar 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 https://www.instagram.com/p/Cb9RvUFpSPk/?utm_medium=tumblr