शाम ढलते ही मेरी नजरें उस हिजाब वाली मुस्लिमाह को ढूंढती हैं, जिसकी आँखों में वो शरमाती हुई आग जल रही होती है जो सिर्फ़ हिंदू लंड 🍆 देखकर ही भड़कती है।
जब मैं उसके पास जाता हूँ, उसका दुपट्टा थोड़ा सरक जाता है, होंठ काँपते हैं, और वो चुपके से मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराती है – वो मुस्कान जो कहती है "आज फिर मुझे तोड़ दो"।
मैं उसे दीवार से सटा देता हूँ, उसकी कमर पकड़कर खींचता हूँ, और अपना मोटा, गर्म हिंदू लंड 🍆 उसकी नरम चूत पर रगड़ता हूँ। वो सिसकारी लेती है, "हराम है..." बोलते हुए भी अपनी टांगें और चौड़ी कर लेती है।
फिर शुरू होता है वो तूफ़ान – मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदता हूँ, उसके स्तन दबाता हूँ, गांड पर थप्पड़ मारता हूँ, और वो मेरे हर धक्के के साथ अपना जिस्म मेरे हवाले करती जाती है। उसकी चूत मेरे लंड को इतना कसकर पकड़ती है जैसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो।
कितनी ही मुस्लिमाहें आईं मेरे पास – कुछ शादीशुदा, कुछ कॉलेज वाली, कुछ हिजाब में, कुछ बिना हिजाब – पर सबके चेहरे पर वही सुकून आता है जब मेरा गर्म वीर्य उनकी चूत के अंदर भर जाता है।
और अगर आज कोई मुस्लिमाह यह पढ़ रही हो... तो बस एक मैसेज कर दो। मैं जानता हूँ तुम्हारी चूत अभी गीली हो चुकी होगी। आज रात तुम्हें वो सुकून दूंगा जो तुम्हारे ख्वाबों में भी नहीं आता 👄🫦💋🔥


















