दो अनुभवी जोड़ों के साथ दस दिन की थाईलैंड की यात्रा. (पहला भाग)
मैं अरचु आज आपको अपने थाईलैंड के दौरे जिस पर मैं अपने दो अनुभवी और पहचान के जोड़ों के साथ दस दिन के लिए गई थी की कहानी सुनाने जा रही हूँ. कहानी को शुरू करने से पहले इसके किरदारों के बारे में थोड़ी जानकारी दे देती हूँ ताकि कहानी को पढने वालों को किरदारों को समझने में और उनके रोल को कहानी में समझने में आसानी हो जाए.
रवि जी और अनु एक आकर्षक कपल हैं. रवि जी का व्यक्तित्व काफी मनमोहक है और उन्हें काफी महारत हासिल है चुदाई के खेल में. उनका लौड़ा भी काफी कड़क और मजबूत है. अनु रवि जी की घरवाली, एक सुडौल शरीर और आकर्षक महिला हैं. उनके चूचे भी एक दम सुडौल और बड़े दीखते हैं. उनकी गांड थोड़ी बाहर को उभरी हुई है जो किसी भी मर्द के पेंट में टेंट बनाने को काफी है.
अमित जी, एक मजबूत कद काठी के हट्ठे कट्ठे इंसान हैं. बिस्तर के खिलाड़ी तो हैं ही उसके अलावा उनके सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी काफी कमाल का है. उनका हथियार भी बहुत मस्त और मजेदार है. लम्बी रेस में महारत हासिल है उन्हें. जया, के नैन नक्श काफी तीखे हैं और शरीर भी गजब का है. जया के चूचे बड़े और मोटे हैं जो उसके शरीर की शोभा बढाते हैं. जया की गांड ज्यादा बाहर नहीं है पर है काफी बढ़िया जो अक्सर मर्दों को पसंद आता है.
दस दिन का थाईलैंड दौरा मैंने और सैम ने प्लान किआ और बाद में अपने कपल दोस्तों रवि 43, अनु 41 और अमित 40, जया 38 को भी इसमें शामिल किआ. प्लान सैम का था पर किस्मत सैम के साथ नहीं थी, अचानक ऑफिस में कुछ जरूरी काम आने की वजह से सैम को दौरा रद्द करना पड़ा. खैर, कुछ कर नहीं सकते थे जो उपरवाला तय करता है होता बिलकुल वैसा ही है.
सभी निराश हो गए और मैं कुछ ज्यादा क्यूंकि सब कुछ प्लान करने वाला बंदा ही न जाए तो दुःख होना तो लाजिमी ही है. सैम ही सबसे ज्यादा इस दौरे पर जाने के लिए उत्सुक था और काफी खुश भी था इस दौरे को लेकर. आखिरी मौके पर जब ऐसा मसला सामने आया तब हमने इस दौरे को रद्द करने का सोच लिया और इस के लिए हम एक साथ बैठे और एक मत से फैसला लेने के लिए तैयार हो गए.
सभी ने एक सुर में इस दौरे को रद्द करने के लिए हामी भर दी थी पर अकेले सैम ने कहा “इस दौरे को रद्द नहीं करना अरचु सबके साथ जाएगी और इस दौरे का पूरा लुत्फ़ उठाएगी”. सैम हमेशा से ही सपोर्टिव पति रहे हैं हर मामले में. सैम के द्वारा जोर डालने पर सभी कपल ने भी दौरे को रद्द न करने का फैसला किआ और मैंने भी उनके साथ अकेले जाने का निर्णय किआ.
हालांकि, अकेले मुझे जाने का मन नहीं हो रहा था क्यूंकि दस दिन बिना परिवार के रहना थोडा मेरे लिए भी मुश्किल था पर सैम के बार बार जिद करने और समझाने पर मुझे हामी भरनी पड़ी क्यूंकि सैम ने इसके लिए एडवांस में ही टिकेट और होटल बुक करवा लिया था और अब एन मौके पर उसे कैंसिल करने से काफी नुक्सान होता था इसलिए मैं इस दौरे पर जाने के लिए तैयार हो गई. वैसे जितने भी कपल थे उन सब के साथ पहले हम लोग चुदाई के मैदान में दो दो हाथ कर चुके थे इसलिए कोई ख़ास परेशानी होने वाली थी नहीं इसलिए भी मैंने हाँ किआ.
जाने से पहले मैंने थोडा अपना मेकओवर करने का सोचा और इसके लिए अपनी बॉडी का वैक्स करवा लिया उसके बाद मैंने कुछ वेस्टर्न कपडे, लिंगरी और कुछ रात में पहनने के लिए सेक्सी टाइप मेक्सी ले ली जो पारदर्शी थे. जाने वाले दिन हम सभी ने एअरपोर्ट पर मिलने का सोचा और बेसब्री से जाने की तारीख का इन्तेजार करने लगे. आखिर, में वो तारिख भी आ ही गई जिसका हमें बेसब्री से इन्तेजार था. सैम मुझे लेकर एअरपोर्ट छोड़ने आये. मैं सभी से गले लग कर मिली और तभी सैम ने सबसे गले मिलने के बाद सभी को कहा. “दोस्तों, दस दिन तक ये तुम्हारे पास है इसका अच्छे से ख़याल करना और इसका ध्यान रखना. ये आज से दस दिन तक तुम लोगों की रेस्पोंसिबिलिटी होगी.”
मैं सैम को गले मिलकर सिक्यूरिटी चेकिंग के लिए एअरपोर्ट के अन्दर आ गई अपने दोस्तों के साथ. चेक इन के बाद हम सभी फ्लाइट में बैठे और फाइनली…हम सभी पट्टाया, में एक लम्बे सफ़र के बाद पहुँच गए.
पहला दिन
हम सभी ने होटल में चेक इन किआ और अपने अपने रूम में चले गए.दोनों कपल अपनी बीवियों के साथ और मैंने अकेले अपने रूम में चेक इन किआ. रूम में जाने के बाद मैंने शावर लिया और जिस तौलिये से अपना बदन पोंछा था उसी को पूरे नंगे बदन पर लपेट लिया और वैसे ही अपनी बालकनी में आ गई थोडा रिलैक्स करने के लिए. सफ़र भी काफी लम्बा था और सैम भी नहीं था इसलिए थोडा सा मैं अपने दिमाग और बदन को सकून देने के इरादे से बालकनी में आना बेहतर समझा.
मैं अपने को थोडा शांत करने के इरादे से आई थी बालकनी में लेकिन दोनों आदमियों अमित और रवि के इरादे कुछ और ही थे और इन्होने कुछ अलग ही प्लान कर रखा था जिसके बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं था. ये लोग आये और मुझे बाथरूम सेक्स के बारे में बताने लगे जो इन्होने थोड़ी देर पहले अपनी अपनी बीवियों के साथ किआ था. इन्होने अपने आने वाले कार्यक्रम के बारे में भी बता दिया ये लोग तीन दिन पट्टाया और तीन दिन बैंकाक रुकने वाले हैं.
उन्होंने कहा,“ कुछ समय हमने तुम्हारे साथ बिताने के लिए सोचा क्यूंकि तुम अकेली हो और बोर हो रही होगी इसलिए हम दोनों ही तुम्हारे पास चले आये और तुम्हें सिर्फ टॉवेल में वो बालकनी में ऐसे खड़े देख कर थोडा हैरान हो गए”. थोड़ी देर ऐसे ही यहाँ वहां की बातें होती रही उसके बाद हम सभी ने साथ में चाय पिया और अपने मस्ती के कार्यक्रम को डिस्कस किआ किस तरह हम इन दस दिनों को मस्ती के लिए इस्तेमाल करने वाले हैं. कुछ घंटे इसी तरह बीते उसके बाद ये दोनों अपने रूम में वापस चले गए और मैं भी सोने के लिए चली गई.
शाम को हम सभी शाम के स्नैक्स के वक्त इकठ्ठा हुए जिसमें वाइन और शराब भी शामिल था. दोनों आदमी रिसेप्शनिस्ट के पास गए और पट्टाया के बीच और एडल्ट क्लब्स की जानकारी लेने लगे. इसके बाद सभी ने साथ में डिनर किआ और अपने अपने रूम में चले गए. मैं भी अपने रूम में जाकर अपने कपडे बदलने लगी और मैं हमेशा ही ऐसा करती हूँ सोने के वक्त थोड़े आरामदायक कपडे पहन कर सोती हूँ इसलिए हमेशा की तरह अभी भी कपडे बदलकर सोने का इरादा था मेरा और मैं वही कर रही थी के तभी रवि आये और उन्होंने कहा अपने कपडे बदलकर हमारे रूम में आ जाओ उनके साथ रात बिताने के लिए.
मैंने भी फटाफट अपने कपडे बदलकर उनके रूम की तरफ चल पड़ी. जैसे मैं दरवाजे से अन्दर गई तो देखा के रवि और अनु एक दम नंगे हैं और अपनी फोटो खींच रहे हैं. उन्होंने मुझे देखा तो कहा “आप भी हमें ज्वाइन कर लो, और बिना किसी शर्म और संकोच के मस्ती करो.” जब हमने अपने खूबसूरत बदन और लम्हों को अपने कैमरे में कैद कर लिया तब हम लोग नंगे ही बालकनी में आ गए और वहां बैठ कर मस्ती की बातें करने लगे.
इधर रवि जी हम दोनों औरतों को नंगी देखकर काफी गर्म हो चुके थे जिसे हम दोनों औरतों ने महसूस कर लिया था और ये भी समझ लिया था के जितनी देर तक ये रुके हैं बस उतनी देर तक ही ये शांत हैं अगर एक बार शुरू हो गए तो इनको रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है और ऐसा ही हुआ..बालकनी में जाकर बैठे हुए कुछ ही देर बीते होंगे की रवि जी की मस्तियाँ शुरू हो गई..और हम दोनों औरतें उसको देखकर सिर्फ मुस्कुरा कर रह गई.
रवि जी ने हम दोनों के चूचों को दबाना और हमें चूमना शुरू कर दिया. रवि जी का लंड पूरा तरह तन कर खड़ा था जो आज हम दोनों को चोद कर ही शांत होने वाला दिख रहा था. रवि जी ने मेरे चूचों को चूसना और अनु के चूचों को अपने हाथों से दबाना जारी रखा. जैसे ही रवि जी ने अनु के चूचों को चूसना शुर किआ मैं रवि जी के टांगों के नीचे बैठ कर उनके कड़क लौड़े को अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसना शुरू कर दिया.
रवि जी तो एक दम से हैरान हो गए और इस कदर हैरान हो गए के उन्होंने अनु के चूचे को एक पल के लिए चूसना बंद कर दिया और मुझे देखने लगे. मैंने भी कनखी मारते हुए उन्हें इशारा किआ आप अपना जारी रखो और मैं अपना काम जारी रख रही हूँ. रवि जी के लौड़े का सुपाड़ा एक दम उनके ज्यादा उत्तेजित होने से पानी पानी हो रहा था जिसे मैंने अपने जीभ से चाट चाट कर साफ़ किआ. उनके लौड़े को मैं एक बार में बड़े ही आराम से अपने मुंह के अन्दर ले पा रही थी.
रवि जी के मुंह से मस्ती के मारे आआआह आआआह और जोर से चूसो अरचु डार्लिंग जैसे बोल निकल रहे थे. इधर रवि जी, अनु के चूचों को छोड़ उसके चूत पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े थे. मैं इधर उन का लंड चूस रही थी और वो अनु के चूत का जाम पी रहे थे. उसके बाद उन्होंने कहा, “अनु, अब ताश के असली पत्ते खोले जाए तो खेल का मजा ही आ जाए,..उन्होंने आगे कहा, अपनी रानी के साथ तो बहुत खेला आज किसी दूसरी रानी के साथ खेलकर देखता हूँ और इतना कहकर वो मेरी तरफ मुखातिब हुए.
मैं घुटने के बल बैठी हुई थी और वो अनु को छोड़ अब सीधे खड़े हो गए जिससे उनका लौड़ा मेरे मुंह के सामने आ गया. मैं लौड़े के उठान को और उसके उभरे हुए नसों को साफ़ देख पा रही थी. रवि जी ने मुझे उठाया और अपने सीने से लगते हुए मुझे गोद में उठा लिया और पास ही में पड़े सोफे पर ले गए.
अनु भी पीछे पीछे आ गई. उसके बाद रवि जी ने, मेरी टांगों के बीच में आकर…अपनी पोजीशन सही बनाई. उन्होंने अपना लौड़ा चूत के ऊपर रखकर अन्दर डालने के बजाय उसको ऊपर नीचे कर मुझे और उत्तेजित करना शुरू कर दिया. मैं बुरी तरह से अपने चूत में लौड़ा लेना चाहती थी लेकिन रवि जी अन्दर डाल ही नहीं रहे थे. तभी अनु ने कहा, क्यूँ तडपा रहे हो बेचारी को अब तो अन्दर दाल दो…ऐसा सुनते ही रवि जी, ने एक ही झटके में अपना लौड़ा अन्दर डाल दिया.
मैं इस धक्के के लिए तैयार नहीं थी लेकिन मैं इसे बर्दाश्त कर गई. रवि जी ने पूरा लौड़ा अन्दर देकर अपना पूरा भार मेरे बदन पर दे दिया और धीरे धीरे अपने लौड़े को मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगे. रवि जी ने एक बार मुझे किस करने के बाद मेरे एक चूचे को मुंह में लिया और दुसरे को अपनी हाथों से मसलने लगे. मैं सीत्कार कर रही थी, और रवि जी मुझे घिरनी की तरह चोदे जा रहे थे. आआआआआह ऊऊऊऊऊऊऊह उम्मम्म्म्म ऊऊऊईइ माआआआआ जैसी आवाजें माहौल को और रंगीन बना रहे थे.
अनु को कुछ समझ नहीं क्या करे तो उसने सीधा अपनी चूत को आकर मेरे मुंह पर रख दिया और मैं उसके चूत को चूसने लगी. इधर रवि जी भी मेरे चूचों को छोड़ अनु के चूचे दबाने लगे. और इस तरह चुदाई होने लगी. रवि जी ने उस रात मुझे हर पोजीशन में चोदा जिसे मैंने खूब एन्जॉय किआ. बाद में रवि जी ने अनु को भी चोदा और हम दोनों को खुश कर दिया. इस तरह हमारी पहली पट्टाया रात का अंत हुआ…एक जबरदस्त चुदाई के साथ. कहानी जारी रहेगी.