ओ चाँद! एक नींद ले आ अपने झोले में भर के इन तारो को गिनते थक गया हु मैं, या एक रात ले आ जादूई मैं भी गिना जाऊं इन तारो के साथ, तेरी तारीफ सभी करते है मिसाले मसहूर हैं तेरी, हर कहानी में जिन्दा है तू मुझसे न जिया जाये इन दागो के साथ, सुबह तो झलवा है आएगी हर रात के बाद, और दिन की तो फितरत ही बेरहमी है, ओ चाँद! एक नींद ले आ अपने झोले में भर के इन तारो को गिनते थक गया हु मैं, या एक रात ले आ जादूई मैं भी गिना जाऊं इन तारो के साथ।












