इश्क़ का हमारे अब हम क्या ही इज़हार करें,
जब मोहब्बत को हमारी ये ज़माना बायाँ कर रहा है...
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@damn-o
इश्क़ का हमारे अब हम क्या ही इज़हार करें,
जब मोहब्बत को हमारी ये ज़माना बायाँ कर रहा है...
अब तो बादल भी चल रहे हैं इधर से झूम के दामू,
तुम्हारे सूखे पड़े मैखाने मैं आख़िर कब बरसात होगी..
ज़िंदगी को जीने की दिशा बदलो दामू,
जीवन की दशा अपने आप बदल जाएगी..
इतने ही तो ऊँचे हैं शायद ख़्वाब तुम्हारे दामू,
जो पर्वत के शिखर पर आकर अक्सर पूरे होते हैं..
आसमाँ को अगर ग़ुरूर है सितारों के होने का,
तो हमने भी कुछ जुगनू अपनी दीवार पर सजा रखे हैं...
हाल तो अपने तुमने अच्छे बता दिए दामू,
मगर इस बुझे हुए चेहरे को कैसे छुपाओगे...
अब रास्ते भी देख रहे हैं हमारी तरह राह तुम्हारी,
चलने को साथ इनपे कोई मुसाफ़िर भी तो चाहिए..
ओर मुश्किल लगते हैं रास्ते अगर चलना पड़े तनहा,
मगर साथ कोई साथी हो तो फिर मंज़िल किसे चाहिए..
पेड़ पर लगे हुए वो पत्ते हो क्या तुम,
जो मौसमों के बदलने पे रंग बदल देते हैं...
तुम सर-ए-महफ़िल मेरी नजरों से कहीं नज़रें ना मिला लेना,
मैं दोस्तों के सवालों का कहाँ तक जवाब दूँगा...
सर-ए-महफ़िल:- In the gathering
भुला के सब कुछ में जा बेठा था तन्हा,
फ़ोन की एक घंटी याद तुम्हारी ले आइ...
इतना भी ना याद हमें किया करो तुम,
इन हिचकियों की वजह क्या दोस्तों को बतायें...
Earphones सी है ये ज़िंदगी,
कितना ही सुलझा के रख लो उलझी हुई ही मिलती है...
अपनी उनसे दोस्ती के ओर क्या सबूत दें दामू,
खेरियत भी हमारी अब उन्ही से पुछते हैं लोग...
दिन रात एक कर दिए इस भाग दोड़ मैं दामू,
वो दोर-ए-सुकून कहाँ जब हम यार साथ थे..
दोर-ए-सुकून:- Era of Peace
फ़ोन पर वो पूछते हैं कि दिन कैसा रहा तुम्हारा,
ग़ैरमोजूदगी में चाँद के रात गुज़र रही हो जैसे...
सितारे ताकते हैं धरती को जो रात भर,
दिल सूरज का जले तो क्यूँ ना जले...
ताकते:- Stare
इन कोरे ख़तों को क्या जलाओगे दामू,
हर हर्फ़ तो तुमने दिल में उतारा है...
हर्फ़:- Word