पहाड़ी कहानी (अमा , बुबु की मन की बात )
पहाड़ी कहानी (अमा , बुबु की मन की बात )
आज बुबु ,अमा एकांत अपने बड़े से घर के आंगन मैं बैठे हुए थे , आज उनके घर का आंगन सुनसान सा मालूम दिखाई पड़ रहा था। मैं जैसे ही बुबु के घर पहूचा –
बुबु बोले – आ रे नातिया कदु दिनक छूटी लयर छे ? मेरा जवाब- बुबु पैला , आम काछु ? दिखाई नी दिराय, बुबु – नातिया , बायव हगे पाणी लियूह जै रै नह । मेरा जवाब- अच्छा , बुबु मि लै बार, पंद्रह दिनक छुटी ऐ रि । बुबु – ठीक हय , बाखई मैं ब्या छी , ये लिजी आनलेह ? मेर…
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