एक शांत समंदर मैं
दबे पाओ
उन लेहरो के शिकन का इंतज़ार कर रहा हु
कब मेरे चेरे की उन सलवटों को चूमे वह
मेरे कंडे पर सर रख कर गुनगुनाये वो
मेरी हथेली पकड़ ले और बोले मुझसे
के फिर तू वो कलम उठा
और टूटे हुए उस रोज़
फिर सम्नदर को जमे से मिलाने की कोशिश कर
…
लौट कर आऊंगा वही
जहा सुकून है मेरा
















