कमबख्त वक्त रुकता नहीं
पर वक्त रुकता नही कवियत्री रुकमिनी कृष्णन कया वक्त रुकेगा? मुझे कोसों काम करने हैलिखना है, चित्रकला करना हैप्रकृति के करीब जाना हैपर वक्त रुकता नहीं मुझे एक दिन में ४८ घंटे चाहिए२४ अपने लिए और २४ दुनिया के लिएहर वो लम्हे को जीना चाहती हूंपर वक्त कमबख्त रुकता नही मुझे गाना है नाचना हैसमूह में मजे करने हैजिम्मेदारियों के भोज में घिरी हूंऔर वक्त है कि रुकता ही नही कुछ दिन थे वो जब मैं हम से हम…
View On WordPress














