A 51-YEAR-OLD Malayalam actor who had levelled sexual abuse allegations against several male actors, including CPI(M) MLA M Mukesh, on Frida
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A 51-YEAR-OLD Malayalam actor who had levelled sexual abuse allegations against several male actors, including CPI(M) MLA M Mukesh, on Frida
#actormukesh Feature by Shyam Shankar Sharma छोटी सी ये ज़िंदगानी रे चार दिन की कहानी तेरी हरिद्वार के गंगा तट पर असंख्य प्राणियों की अस्थियां उनके प्रियजन प्रवाहित कर उन्हें मोक्ष की धारा में बहा आते है,कइयो को यह मोक्ष की धारा नसीब ही नही होती है?समस्त धर्मावलंबी अपने अपने तरीके से अपने प्रियजन की संसार से विदाई की रस्मे निभाते है,कई इन रस्मो से भी महरूम रह जाते है।किंतु यह तो तय है कि जीवन की कहानी को खत्म जरूर होना है।इस जीवन सफर को कोई समझ ही न सका और शायद समझ भी न पायेगा।शैलेंद्रजी यही समझाने का प्रयास शंकरजयकिशन जी की संगीत धारा के माध्यम से समझा रहे है।यह शंकरजयकिशन और शैलेंद्र की विशेषता रही कि उन्होंने अपने फिल्मी गीतों के माध्यम से सदा जीवन की क्षण भंगुरता को प्राथमिक स्थान दिया,जो कार्य प्राचीन काल से ऋषि मुनि करते आये थे वो कार्य फिल्मो के माध्यम से एक मात्र शंकरजयकिशन ओर शैलेन्द्र ने किया,यह एक स्वच्छ अच्छी सौंच थी जो बहुत कुछ सफल तो रही किन्तु दानवी शक्तियाँ हर काल मे अच्छे कार्यो का दमन करती आई है तो फिल्मो को भला कैसे छोड़ती? फिर भी महान व्यक्ति अपना कर्म करना नही छोड़ते,इत्र का गुण सुगंध होता है।शैलेन्द्र सचेत कर रहे है जीवन धूप छांव का खेल है... छोटी सी ज़िंदगानी रे चार दिन की कहानी तेरी हाय रे हाय गम की कहानी तेरी... मानव शांती की बजाय अशांती को पसंद करता है!वह जीना ही नही जानता!उसे संकलन ओर प्राप्ति की जो भूख है वो कभी खत्म होती ही नही,मकड़ी की तरह जीवन के जालो में उलझता जाता है,वह यह भूल जाता है कि सांसो की एक उम्र होती है,इस उम्र को उसे जीना आना चाहिए। ....शाम हुई ये देश वीराना.. क्यो मनुष्य इस बात को समझ नही पाता?जीवन की शाम अवश्यम्भावी है और फिर सियाह काल रात्री... ओर ..तुझको अपने बलम घर जाना राह में मूरख मत लूट जाना... यह एक चेतावनी है मानव को ....समय पल पल भाग रहा है,इधर बुढ़ापा शेरनी सा डराता है,उधर रोग मानव शरीर पर शत्रुवत आक्रमण करते है।जैसे दरार में से पानी बह जाता है,उम्र बही जा रही है फिर भी आश्चर्य है कि मनुष्य स्वतः के अहित के कामो में लगा रहता है।जिस व्यक्ति में स्वार्थ की प्रबलता है,जिसमे मान्यता का आग्रह है और जो असहिष्णु है,वह समन्वय की चेतना को जाग्रत नहीं कर सकता।वृद्धावस्था ओर रोग आपके हर कर्म हर प्रश्न का उत्तर देते है किंतु मज़ेदारी यह है कि उत्तर मिल जाने के बाद भी मनुष्य उसे साँझा नहीं कर पाता और अंदर ही अंदर घुलता रहता है। https://www.instagram.com/p/CTExAKCBBG9/?utm_medium=tumblr