Bundelkhand Ke Lok Devta भी देवताओं के अंश से प्रभावित लगते हैं वह भी किसी न किसी लोक भावना से जुडे हुये हैं। वही देवता लोक की रक्षा करते है
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Bundelkhand Ke Lok Devta भी देवताओं के अंश से प्रभावित लगते हैं वह भी किसी न किसी लोक भावना से जुडे हुये हैं। वही देवता लोक की रक्षा करते है
बुन्देलखण्ड की फाग गायकी एक लोककाव्य है। Bundelkhand Ki Fag Gayki की अनेक विधायें हैं जिनमें से कुछ विलुप्त हो चुकी है और कुछ अभी प्रचलित है
बुन्देलखंड मे किसी भी ऋतु के कोई उत्सव -आयोजन हो या गाँव के किसी खास समय या किसी पर्व-त्योहार पर Bundelkhand ki Rai नृत्य अवश्य होता है, ।
Bundelkhand ka Lamtera का अर्थ है लम्बी टेर के गीत, जो पर्व-त्योहार पर स्नान के लिए नदी-सरोबर या फिर तीर्थ-यात्रा को जाते समय गाये जाते हैं।
बुन्देलखण्ड मे बच्चे बांस और लकडी की डंडी पर मिट्टी के पुतले बनाते हैं। Bundelkhand Ka Tesu बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी को हर्षोल्लासित करता है।
लोक जीवन का आधार साहित्य, कला, संगीत, धर्म, दर्शन, तथा राजनितिक विचारों पर आधारित रहता है। Bundelkhand Ka Lok Jivan इन्ही आधारों पर स्थित है
Bundelkhand Ke Loknritya बधाई, बरेदी, जवारा, नृत्य, सैरा,रावल, राई, कानड़ा, ढ़िमरयाई, बुंदेलखंड के लोग जीवन में प्राण वायु की तरह रचे बसे हैं।
Sanja लोकपर्व मालवांचल में मनाया जाता है, यह पर्व कुवॉरी कन्याओं द्वारा बड़ी आस्था एवं उमंग से मनाया जाता है।