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भाद्रपद पूर्णिमा में क्या है, सत्यनारायण व्रत का महत्व ? पूर्णिमा की तिथि धार्मिक रूप से बहुत ही खास मानी जाती है विशेषकर हिंदूओं में इसे बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि माना जाता है। वैसे तो प्रत्येक मास की पूर्णिमा महत्वपूर्ण होती है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा बहुत ही खास होती है। इसके खास होने के पिछे कारण यह है कि इसी पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष आरंभ होता है जो आश्विन अमावस्या तक चलते है। इस पूर्णिमा को स्नान दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि से ही चंद्र वर्ष के महीनों के नामों का निर्धारण हुआ है। मान्यता रही है कि माह में पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है उसी के अनुसार उस माह का नाम रखा जाता है। समस्त 12 महीनों के नाम नक्षत्रों पर आधारित हैं। ऐसे में भाद्रपद पूर्णिमा भी इसे इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा उत्तर भाद्रपदा या पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र में होता है। मान्यता है कि भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से उपासक के सारे कष्ट कट जाते हैं और घर सुख-समृद्धि व धन-धान्य से भरा रहता है। व्रती अपने जीवन में पद व प्रतिष्ठा को प्राप्त करता है। नोट - इस साल भाद्रपद पूर्णिमा तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितंबर माह की 13 तारीख को है। पूर्णिमा उपवास व पूर्णिमा श्राद्ध की तिथि भी 13 सितंबर रहेगी। पूर्णिमा के अवसर पर सत्यनारायण पूजा भी करवायी जाती है। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru #Bhadrapadpoornima #SatyanarayanVrat #Importance https://www.instagram.com/p/B2WMfmDl01L/?igshid=1ixzh1lu9u69o
अगर आप भी रहते है, तनाव में तो यह करना कभी न भूलें वास्तु का प्रचलन आज के समय में लोगों में काफी देखने को मिलता है। लोग अब हर काम को अंजाम देने से पहले वास्तु नियमों को फोलो जरुर करते हैं। क्योंकि वास्तु में हर समस्या का समाधान बताया गया है। जहां वास्तु को घर के अंदर व बाहर दोनों के लिए प्रयोग किया जाता है। वहीं घर में रहने वाले लोगों के लिए वास्तु के अलग नियम होते हैं। जैसे कि कोई व्यक्ति नींद या तनाव से ग्रस्त हो तो वह रात में कभी सो नहीं पाता है। सकारात्मक ऊर्जा यदि घर में रखनी हो तो वास्तु की मदद ले सकते हैं। सुबह घूमने जाना भी तनाव और नींद की समस्या को कम करता है। घर में सभी एक साथ भोजन करें ऐसा करने पर आपसी सामंजस्य बनी रहती है। यदि आप तनावग्रस्त रहते हों, सोते समय नींद नहीं आती हो तो रात को सोते समय शयनकक्ष में देसी घी का दीपक जलाएं। कभी भी शयनकक्ष में झूठे बर्तन न रखें और न ही किसी तरह का नशा करें। सोने के कमरे में झाड़ू न रखें, इससे आपसी विश्वास कम होता है। वास्तु के अनुसार घर के मंदिर में लाल बल्ब कभी न लगाएं। लाल रंग तीव्रता का वाहक है। लेकिन यह स्थल मन की शांति का स्थल है। यदि बल्ब जलाना है तो सफेद या पीले रंग का बल्ब जलाएं। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru #Tension https://www.instagram.com/p/B2Qg5mNlQpB/?igshid=w00jrqsnwtu3
एकमात्र ऐसा मंदिर, जहाँ दो वीर योद्धा करते है, अदृश्य आरती मध्य प्रदेश के सतना जिला के अंतर्गत त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा का भव्य मंदिर है। पहाड़ा वाली मैहर मंदिर का एक ऐसा रहस्य है जो आज भी बरकरार है। मान्यता है कि यहां दो वीर योद्धा मां की आरती करने आते है पर कभी दिखाई नहीं देते है। शाम की संध्या आरती होने के बाद जब मंदिर का पट बंद करके पुजारी नीचे आ जाते हैं तब मंदिर के अंदर से घंटी की आवाज सुनाई देती है। कई बार तो पुष्प चढ़े होने के प्रमाण भी मिले है। ये खुद दावा मंदिर के पुजारी ही कर चुके है। आसपास के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि मैहर वाली माता के भक्त आल्हा-उदल अभी भी पूजा करने आते हैं।अक्सर सुबह की आरती करने का सौभाग्य उन्हीं दो भाईयों को मिलता है। मां शारदा के साथ ही आल्हा-उदल की भक्ति पूरे जगत में चर्चित है। मान्यता है कि सदियों से हर दिन भोर में 2 बजे से 5 बजे के बीच मां शारदा के प्रथम दर्शन का सौभाग्य आज भी आल्हा और उदल को ही मिलता है। ये वही आल्हा और उदल है, जिन्होंने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। आल्हा और ऊदल ने ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी। इसके बाद आल्हा ने ही 12 वर्षों तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था। माता ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था। कहा जाता है कि आल्हा माता को माई कह कर पुकारा करता था। मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है, जिसे आल्हा तालाब कहा जाता है। यही नहीं, तालाब से 2 किलोमीटर और आगे जाने पर एक अखाड़ा मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा यूं तो हजारों भक्तों पर अपनी कृपा बरसा चुकी है। लेकिन आज भी एक ऐसी दंतक कथा है जिसको सुनने के लिए लाखों भक्त बेताब रहते है। मुख्य पुजारी देवी प्रसाद ने बताया कि 52 शक्ति पीठों में मैहर शारदा ही ऐसी देवी है जहां अमरता का वरदान मिलता है। मां की कृपा कब किस भक्त पर हो जाए ये कोई नहीं जानता है। हालांकि माता की एक दर्जन दंतक कथाएं सतयुग, द्वापर, त्रेता एवं कलयुग में सुनाई जा रही है। मंदिर के पुजारी देवी प्रसाद का कहना है, कि हमारी चौथी पीढ़ी माता की सेवा कर रही है। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePredic https://www.instagram.com/p/B2L7b8wlb4k/?igshid=9izr5zikoevh
आपके सपने में भी आती है, गाय तो जानें क्या होंगे उसके शकुन और अपशकुन? हिन्दू धर्म के अनुसार गौ सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। गाय को पालने से घर में शांति मिलती है तथा भगवान श्री कृष्ण व लक्ष्मी माता का सीधे आशीर्वाद मिलता है। गाय के प्रत्येक अंग में ईश्वर का वास है। दूध दोहते समय गौ का ठोकर खा जाना, दूध का बिखर जाना आदि अन्य अपशकुन माने गए हैं जिनके लिए प्रायश्चित विधान है। स्वप्न में काले बछड़े से युक्त काली गौ का दक्षिण दिशा में जाना मृत्युसूचक माना गया है। दूध दोहते समय गाय का उच्च स्वर में रंभाना भी अपशकुन कहा गया है, जिसका कुप्रभाव यज्ञ में भुखमरी की सूचना माना जाता है। गौ का घर की छत पर आ जाना, उनके स्तनों से रुधिर का टपकना, अद्भुुत घटनाएं कही जाती है। गौ द्वारा यज्ञ स्थान का अतिक्रमण करना अशुभ माना गया है। एक गौ का दूसरी गौ का दूध पीना आदि गुह्य सूत्रों में गौ से संबंधित अपशकुन कहे गए हैं, जिनके प्रायश्चित करने के निर्देश किए गए हैं। यज्ञ की गाय का पूर्व की ओर जाना यजमान की प्रसन्नता का सूचक है। स्वप्न में भी काली गौ का दक्षिण की ओर जाना अशुभ है। वास्तव में दक्षिण दिशा में पितरों तथा यम का निवास है, जिसके कारण गौ का इस दिशा में जाना भी अपशकुन कहा गया है। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru https://www.instagram.com/p/B2LhZAXFxy7/?igshid=169x3nlaqzom9
तीर्थ यात्रा से कैसे मिलता है पुण्य के साथ स्वास्थ्य लाभ ? प्राचीन भारतीय परंपरा है कि हर व्यक्ति को तीर्थ यात्रा जरूर करनी चाहिए। तीर्थ यात्रा जैसे चार धाम की यात्रा, द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, काशी जैसे धार्मिक स्थलों की यात्रा करने का विधान है। आमतौर पर लोग तीर्थ यात्रा को धर्म और दान-पुण्य से जोड़कर देखते हैं, लेकिन मंदिर और तीर्थों की यात्रा से धर्म के साथ ही कई अन्य लाभ भी मिलते हैं। समय-समय पर तीर्थ यात्रा करने से दैनिक जीवन में चल रही परेशानियों से कुछ समय के लिए मुक्ति मिल जाती है। एक जैसी दिनचर्या की वजह से तनाव बढ़ता है और उत्साह कम होता जाता है। ऐसे में जब हम तीर्थ यात्रा पर जाते हैं तो मन प्रसन्न होता है। नई ऊर्जा मिलती है। यात्रा से लौटकर हम पूरी उत्साह के साथ काम कर पाते हैं। आमतौर पर अधिकतर प्राचीन तीर्थ और मंदिर ऐसी जगहों पर बनाए गए हैं, जहां का प्राकृतिक वातावरण हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। ज्यादातर मंदिरों में सीढ़ियां होती ही हैं, इन सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने से व्यायाम होता है। भजन-कीर्तन में तालियों बजाने से एक्यूप्रेशर के लाभ मिलते हैं। घंटी आवाज नकारात्मक सोच को खत्म करती है। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru #TirthYatra #HealthBenefits #Saintly https://www.instagram.com/p/B1_BRvzlJ20/?igshid=1w8faq0l3y4s8
समस्या है, तो उसका समाधान भी है। सरला नाम की एक महिला थी। रोज वह और उसके पति सुबह ही काम पर निकल जाते थे । दिन भर पति ऑफिस में अपना टारगेट पूरा करने की ‘डेडलाइन से जूझते हुए साथियों की होड़ का सामना करता था। बॉस से कभी प्रशंसा तो मिली नहीं और तीखी-कटीली आलोचना चुपचाप सहता रहता था। पत्नी सरला भी एक प्राइवेट कम्पनी में जॉब करती थी। वह अपने ऑफिस में दिनभर परेशान रहती थी।ऐसी ही परेशानियों से जूझकर सरला लौटती है। खाना बनाती है। शाम को घर में प्रवेश करते ही बच्चों को वे दोनों नाकारा होने के लिए डाँटते थे पति और बच्चों की अलग-अलग फरमाइशें पूरी करते-करते बदहवास और चिड़चिड़ी हो जाती है। घर और बाहर के सारे काम उसी की जिम्मेदारी हैं।थक-हार कर वह अपने जीवन से निराश होने लगती है। उधर पति दिन पर दिन खूंखार होता जा रहा है। बच्चे विद्रोही हो चले हैं।एक दिन सरला के घर का नल खराब हो जाता है। उसने प्लम्बर को नल ठीक करने के लिए बुलाया।प्लम्बर ने आने में देर कर दी। पूछने पर बताया कि साइकिल में पंक्चर के कारण देर हो गई। घर से लाया खाना मिट्टी में गिर गया, ड्रिल मशीन खराब हो गई, जेब से पर्स गिर गया। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru #Problem #Solution https://www.instagram.com/p/B1-vn5ElZPk/?igshid=4c96p6ghndak
किस दिन मनायें हरतालिका तीज व्रत,जिससे मिले संतान सुख और सौभाग्य? हिन्दी पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। हरतालिका तीज 1 सितंबर या 2 सितंबर में से किस तारीख को मनाई जाएगी, इस बात को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। कुछ लोग 1 सितंबर की तारीख बता रहे हैं तो कुछ 2 सितंबर की तारीख को सही बता रहे हैं। इस दुविधा को खत्म करने के लिए हमने शास्त्रों का सहारा लिया और निष्कर्ष ये निकला है कि हरतालिका तीज का व्रत 2 सितम्बर को ही करना उचित है। इस वर्ष सौभाग्य रक्षा का व्रत हरतालिका तीज 02 सितंबर दिन सोमवार को ही मान्य है। ज्योतिषीय गणना की मान्यता के अनुसार, चतुर्थी युक्त तृतीया का सौभाग्य वृद्धि में विशिष्ट महत्व है। 02 सितंबर सोमवार को तृतीया का पूर्ण मान, हस्त नक्षत्र का उदयातिथि योग तथा सायंकाल चतुर्थी तिथि की पूर्णता तीज पर्व की महत्ता को बढ़ाती है। इसका प्रमाण ‘पर्व मुहूर्त निर्णय ग्रन्थ’ में इस प्रकार प्राप्त है- “चतुर्थी हस्त नक्षत्र सहिताया तु सा तृतीया फलप्रदा।” इतना ही नहीं, प्रमाण यह भी मिलता है कि हस्त नक्षत्र में तीज का पारण वर्जित है, जबकि रविवार 01 सितंबर को व्रती महिलाओं को 02 सितंबर दिन सोमवार के भोर में पारण हस्त नक्षत्र में ही करना पड़ेगा, जो शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं है। यदि 02 सितंबर को व्रत रखेंगे तो 03 सितंबर दिन मंगलवार के भोर में चित्रा नक्षत्र का पारण सौभाग्य-वृद्धि में सहायक माना गया है। अतः सर्वसिद्ध हरितालिका तीज व्रत चतुर्थी युक्त तृतीया एवं हस्त नक्षत्र के कारण 02 सितंबर सोमवार को ही मान्य है। For Free Prediction Call Now: 0124-6674671 or whatsapp: 9821599237 कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है :- https://goo.gl/rfz1Cb *For more information, visit us: www.astroscience.com or www.yesicanchange.com #GdVashist #Astrology #FreePrediction #LalKitab #VashistJyotish #DialAstroGuru #hartalikateej https://www.instagram.com/p/B108UZKFaFm/?igshid=ndhjr7heekrd