Posted @withrepost • @manavkaul पूरा दिन बड़ी बेक़दरी से निचोड़ देता है हमारे हर सपने को। बस नींद ही एक सहारा है, जो पूरी रात में तोड़ देती है, दिन भर की सारी परेशानियों के धागों को। नींद हर सुबह फिर कुछ नए सपनों की चिल्लर जेब में रख देती है।. कैसे हम ख़र्च होते जाते है? पर जितने ख़र्च होते है, उतने ही भारी होते जाते है।. अब हमारे पास वो बचपन वाली गुल्लक भी नहीं बची जिसमें हम अपने ख़ास सपनों की चल्लर संभालकर रख देते थे।. गुल्लक छूट चुकी है पर हम सबने अपनी एक छोटी चोर-जेब अभी भी बचा कर रखी है। वहाँ हमारा पच्चीस पैसे वाला सपना अभी भी धड़क रहा होता है। बाज़ार में अब पच्चीस पैसे चलन से बाहर है हम जानते है। पर किसी चिलचिलाती दौपहर में जब सारा कुछ हारा हुआ सा लगता है तो हाथ ख़ुद-बाँ-ख़ुद चोर जेब पर जाता है। एक कोने में बैठे हम अपने सपने को अपनी हथेली रखकर ताकते है।. कुछ देर में उस चवन्नी से बरगद फूट पड़ता है.. पीपल की हवा तैरने लगती है.. और अचानक डामर की सूखी सड़कों से देवदार और चीड़ फूट पड़ते हैं। #somewriting #smokingkills #harbalcigarettes #saynotocigarettes Pic clicked by.- @super_devang https://www.instagram.com/p/BstCf24g4gmE8V5xQ_Zta61N8dLTMh3tKkmdmo0/?utm_source=ig_tumblr_share&igshid=wq14j2ydp1mx











