'Shesh Vihar' a hindi story by "Nirdesh Nidhi" कहानी- 'शेष विहार' कथाका...
seen from Brazil

seen from China
seen from United Kingdom
seen from Netherlands

seen from Spain

seen from United States

seen from United States

seen from France

seen from United Kingdom

seen from United States

seen from Spain

seen from United States
seen from Germany

seen from United States

seen from Philippines

seen from United States
seen from China
seen from China
seen from United States
seen from United States
'Shesh Vihar' a hindi story by "Nirdesh Nidhi" कहानी- 'शेष विहार' कथाका...
तारीख पे तारीख.... :कविता (तरसेम कौर)
तारीख पे तारीख…. :कविता (तरसेम कौर)
देश के किसी भी नागरिक को समय पर न्याय न मिल पाना भी हमारे सरकारी तंत्र और लचर क़ानून व्यवस्था की पोल तो खोलता ही है, साथ में यह भी दर्शाता है कि सदियों बीत जाती है पर बेबस और लाचार लोगों को इन्साफ नहीं मिल पाता है, उनकी आवाजों कहीं फाइलों में ही दबी रह जाती हैं | ऐसा की कुछ सच दिखाने का प्रास करती तरसेम कौर की कविता …...संपादक
तारीख पे तारीख….
तरसेम कौर शिक्षा- ग्रेजुएट, दिल्ली विश्वविद्यालय रूचि…
View On WordPress
समय के झरोखे से हरिशंकर परसाई… : आलेख (सुधेंदु पटेल)
समय के झरोखे से हरिशंकर परसाई… : आलेख (सुधेंदु पटेल)
(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ” का दसवाँ दिन ……..’सुधेंदु पटेल’ का आलेख )
हरिशंकर परसाई केवल लेखक कभी नहीं रहे. वे लेखक के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी थे. उनका समूचा जीवन आन्दोलनों और यूनियनों से जुड़ा रहा. आन्दोलन छात्रों के, श्रमिकों के, शिक्षकों के, लेखकों के भी. वे लेखक के रूप में अपनी भूमिका के संबंध में असंदिग्ध थे. लेखक साम्प्रदायिकता का विरोध करना चाहिये, विश्वशांति का समर्थन करना…
View On WordPress
शाकिर उर्फ़...... : कहानी (अनवर सुहैल)
शाकिर उर्फ़…… : कहानी (अनवर सुहैल)
‘राजू ने कहा – ”हम खुद अपने गांव में हर साल दुर्गा-पूजा में खुबसूरत ढंग से पंडाल सजाते हैं साब, भले से दाढ़ी-टोपी वाले गुस्सा करते हैं लेकिन कितना अच्छा लगता है कि लोग कितनी श्रद्धा से पूजा करते हैं और मुहर्रम के ताजिये में उनकी दर्जनों मन्नत वाली ताजिया कर्बला में सिराई जाती हैं। मेरे कितने हिन्दू भाई हैं जो ख्वाजा गरीब नवाज़ के दर पर हाजिरी देने जाते हैं… आप ठीक कहते हैं साब… ये सब सियासत है जो…
View On WordPress
चाँद के टुकड़े एवं अन्य : कवितायें (ब्रजेश कानूनगो)
चाँद के टुकड़े एवं अन्य : कवितायें (ब्रजेश कानूनगो)
अगर जीवन में प्रेम न हो तो जिन्दगी बेज़ार हो जाती है | संसार की उत्पत्ति ही प्रेम की धुरी पर टिकी है | प्रेम के उसी स्पंदन की खूबसूरत अनुभूति को सहज ही अनुभव कराती हैं ब्रजेश कानूनगो की कवितायें ….. संपादक
चाँद के टुकड़े
ब्रजेश कानूनगो 25 सितम्बर 1957 देवास, मध्य प्रदेश मे जन्म |व्यंग्यसंग्रह-‘ पुन: पधारें, ‘सूत्रों के हवाले से कविता पुस्तिका-‘ धूल और धुएँ के परदे में, बाल कथाओं की पुस्तक- ‘ फूल…
View On WordPress
योग के बहाने : व्यंग्य (आरिफा एविस)
योग के बहाने : व्यंग्य (आरिफा एविस)
पड़ोस में रहने वाले चंदू ने कहा, ‘क्या कभी भोग दिवस भी मनाया जाता है? रोज कोई न कोई डे हो और लोगों को बदले में कुछ मिले. चाचा अगर भोग दिवस होगा तो लोगो को तरह तरह का खाने को मिलेगा. जिन्हें कभी वो चीजें नसीब न हुई वो मजा ले लेंगे. कभी फल दिवस तो कभी मेवा दिवस ऐसे ही रोजाना दिवस मनाने चाहिए.’तभी गुप्ता जी बोले पड़े, ‘ तुम अच्छे निकले भला ऐसा भी हो सकता है क्या ? योग का तो अपना अर्थ है पर भोग दिवस ,…
View On WordPress
मुस्कुराहट बिखेरने से मिलती है वास्तविक खुशी: आलेख (सुशील कुमार भारद्वाज)
मुस्कुराहट बिखेरने से मिलती है वास्तविक खुशी: आलेख (सुशील कुमार भारद्वाज)
एक इंसान की खुशी दूसरे की भी खुशी हो, कोई जरूरी तो नहीं. जैसे इस दुनियां में सुंदरता और संतुष्टि का कोई निश्चित पैमाना नहीं है ठीक उसी प्रकार खुशी का कोई निश्चित स्वरूप या पारामीटर नहीं है. खुशी हमें हर उस क्षण से मिल सकती है जिस पल हम स्वयं को आनंदित करते है. परिवार, दोस्त, सहकर्मी या फिर जीवन में मिलने वाले हर प्राणी से निष्पक्ष एवं निष्कलुष भाव से मिलते हैं. जहां हम कुछ वापस पाने की आस लगाने…
View On WordPress
जिस्म की गिरफ़्त : कवितायेँ (डॉ. मोहसिन ख़ान 'तनहा')
जिस्म की गिरफ़्त : कवितायेँ (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)
सामाजिक बुनावट से त्रिस्कृत और अछूत जिन्दगी के मानवीय पहलुओं को रेखांकित करती, कथित सभ्य समाज को खुद का विद्रूप चेहरा दिखाती एवं वर्तमान व्यवस्थाओं पर प्रश्न चिन्ह खडा करती डॉ मोहसिन खान की बेहतरीन कवितायें …. संपादक
जिस्म की गिरफ़्त
डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निर्देशक जे. एस. एम. महाविद्यालय, 201, सिद्धान्त गृह निर्माण संस्था, विद्या नगर, अलीबाग – ज़िला रायगढ़…
View On WordPress