तारीख पे तारीख.... :कविता (तरसेम कौर)
तारीख पे तारीख…. :कविता (तरसेम कौर)
देश के किसी भी नागरिक को समय पर न्याय न मिल पाना भी हमारे सरकारी तंत्र और लचर क़ानून व्यवस्था की पोल तो खोलता ही है, साथ में यह भी दर्शाता है कि सदियों बीत जाती है पर बेबस और लाचार लोगों को इन्साफ नहीं मिल पाता है, उनकी आवाजों कहीं फाइलों में ही दबी रह जाती हैं | ऐसा की कुछ सच दिखाने का प्रास करती तरसेम कौर की कविता …...संपादक
तारीख पे तारीख….
तरसेम कौर शिक्षा- ग्रेजुएट, दिल्ली विश्वविद्यालय रूचि…
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