कुछ बातें अभी बाकी है
इंतज़ार नहीं उस चाय का, रूखी पत्तियों सी यादें है
बुलाना है सिर्फ एक चुस्की के लिए, कुछ बातें अधूरी सी बाकी है।
उन शबनमी भागों में, कभी इंतज़ार किया करते थे
जस्बातों सी करारी चाय पर तुम्हारा,
आओ फिर कभी होठो से लगा लो उन चुस्कियों को
कुछ बातें अभी बाकी है !
वशिष्ठ २ अप्रैल २०१८












