बचपन से मिलना
आज फिर में अपने
बचपन से मिला
दिलो दिमाग मेरा
तितली सा खिला
अपने जीवन में हम
सारे पहुंचे हैं कहीं न कहीं
मिलते ही सबको पाया
मानो रुके थे वही के वही
कुछ तो बात हैं
हमारे बचपने में
पच्चीस सालों से यादें
दबाये रखा था सीने में
कुछ खट्टी कुछ मीठी
कुछ कम कुछ ज्यादा
भूली बिसरी यादें
आज फिर हुई तरो ताज़ा
वह स्कूल के इलेक्शन,
वह पढाई की टेंशन,
किसके होंगे नंबर वन,
ऐवई बातों पर अनबन
जिन बातों पर तब
जंग छिड़ जाती थी
केवल यादें ही अब
हमे गुदगुदाती हैं
--- शशि










