'कारीगरी कलम की' प्रस्तुत करते हैं, 'हमारे पिटारे से' सीरीज में ; झारखण्ड ; रांची की कवियित्री अपूर्वा श्रीवास्तव जी की इक कविता, जो माँ पर आधारित है। आप भी पढें और कमेन्ट बॉक्स में अपनी प्रतिक्रिया दें 😊💫🌻 निरा एकाकीपन के बोझिल क्षणों में कल्पना की रेश्मी तागों से फँस जाती है माँ की फटी एड़ियां परत दर परत सहम सहम कर नोचती हूँ जिल्द करती हूँ समतल चाँद के सापेक्ष्य एड़ियों को । चाँद प्राकृतिक उपग्रह है धरा का माँ की एड़ी वही चाँद जिसकी धरती - गृहतल ! खुरदुरी फटी एड़ी पुराने खँडहर की भांति आंशिक अवशेष है वृद्ध काय की जो अड़िग है थकती नहीं - घर की नींव का स्थायित्व माँ की एड़ी में विश्राम करता है । ~✍️ अपूर्वा श्रीवास्तव @masakaliii_ LIKE | COMMENT | SHARE | AND FOLLOW THE PAGE @karigari_kalam_ki रोचक रचनाओं को पढ़ने के कृपया पेज को जरूर फॉलो करें 😊💫🌻 @karigari_kalam_ki #apoorva #maskali #hindisahitya #hindikavitayen #instapoetrygram #instapost😊 #poetry #hindikavita #instahindi #instahindipoetry #karigarikalamki #karigari_kalam_ki #ankuraanandit #fypシ #hindishayari #shayari #poetryoftheday #maa #maakapyaar #viralpoetry #trendingposts #poetrypage #explorepages #oldmemories❤️ (at Lucknow लखनऊ, UP, India) https://www.instagram.com/p/CYytKJvlxGf/?utm_medium=tumblr











