'This one has seen her. She visits the market in Mistral every Fredas and always she buys something different.'
-- Patrani to Eiki, adding to the gossip about the Altmer woman.
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'This one has seen her. She visits the market in Mistral every Fredas and always she buys something different.'
-- Patrani to Eiki, adding to the gossip about the Altmer woman.
'Big Lakahnz runs the best rickshaw on the island. He also runs the ONLY rickshaw on the island, which makes him a lot of coin.'
-- Patrani, remarking as a muscular and shirtless pahmar-raht passes by; he is effortlessly pulling a hand rickshaw, carrying two tittering Altmer kinladies, out of Mistral and into the Khenarthi countryside
#Patrani - (1956). #shankarjaikishanalbum #Lata - Music : #ShankarJaikishan . Director : #VijayBhatt. Lyrics : #HasratJaipuri.. Producer : Prakash Pictures. Cast : #Vyjayanthimala, #PradeepKumar, #OmPrakash, #Shashikala, #DurgaKhote, #David, #Jeevan, #RameshSinha, #PraveenPaul, #GadadharSharma, #Krishnakant, #MayaDass, #Shalini, #Indira, #Ranjana, #Kanchanmala, #Neera, #KantaKumari, #LeelaMishra, #Helen, #SheelaVaz... https://www.instagram.com/p/CNVkQvmBulD/?igshid=3hfj0wu958bq
#selfie with #patrani #tram #juteinteriordesign #publictransport #commute #environmentfriendly #sustainable #selfiee #selfienation #selfieee #selfiegram #selfietime #sokolkata #heritage #heritageofcalcutta #calcuttaheritage #calcutta_ig #redminote6prophotography (at Esplanade Tram Depot) https://www.instagram.com/p/CKVdg2Cl1oZ/?igshid=16d2dpr3zlhky
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चंद्रमा मद भरा क्यो झूमे बादर में,वो खुशी अब कहाँ मुझ विरहन के घर मे!!
by
Shyam Shankar Sharma
कुछ फिल्मे ऐसी होती है जो समस्त खूबियों से लबरेज होती है किंतु उनका नाम याद कदा ही सुनने में आता है,ऐसी ही एक बेहद खूबसूरत फिल्म थी पटरानी जिसका संगीत अत्यन्त प्रभावशाली संगीत महान शंकरजयकिशन ने निर्मित किया था।
1956 की फिल्म पटरानी के निर्माता थे शंकर भाई भट्ट और निर्देशक थे विजय भट्ट।वैजयन्तीमाला,प्रदीप कुमार,ओम प्रकाश,शशि कला, दुर्गा खोते,डेविड,जीवन आदि कलाकार इस फिल्म में थे।संगीत से सजाया था शंकर जयकिशन ने। इस फिल्म में एक खूबी यह थी की इसमे एक भी पुरुष गीत नहीं था,लता मंगेशकर,उषा मंगेशकर और मीना मंगेशकर और साथी इस फिल्म की गायिकाएँ थी।सभी 10 गीतों में मुख्य स्वर लतामंगेशकर का था।इस फिल्म में चार कोरस थे. 1,रंग रंगीली पगियाँ बांधे आये ऋतू राजा.....लतामंगेशकर व साथी
2,पावन गंगा सर पर सोहे.....लतामंगेशकर व साथी
3,राजा प्यारे मत करो प्यार का मोल.......लतामंगेशकर,उषामंगेशकरऔर साथी
4,अरे कोईजाओ ऱी पिया को बुलाओ री....लतामंगेशकर,उषामंगेशकर, मीना मंगेशकर ओर साथी
इस फिल्म में एक कोरस गीत और था...दुल्हन गोरी घूँघट में मुस्काये देखो जी कही उनसे भी शरमाये, यद्यपि यह गीत फिल्म में रखा गया था जिसे डिस्क पर रिलीज नहीं किया गया।यदि इस गीत को भी शुमार कर लिया जाय तो इस फिल्म में कुल 11 गाने थे। आज का गीत बेहद बेहद खूबसूरत है जिसे महान शैलेंद्र ने लिखा और लतामंगेशकर ने गाया था,यह गीत संगीत का अनुपम पुष्प है। " चन्द्रमा मद भरा क्यों झूमे है बादर में,वो ख़ुशी कहाँ मुझ विरहन के घर में,चंद्रमा " पटरानी फिल्म आज लगभग 62 वर्ष का समय गुजर जाने के बाद भी अगर आज भी याद की जाती है तो सिर्फ महान शंकर जयकिशन के मनमोहक संगीत के कारण,इसके गीत अत्यन्त लोकप्रिय और सफल रहे थे।यह खेद का विषय है कि कुछ शंकरजयकिशन प्रेमियों को छोड़कर अधिकांश शंकरजयकिशन को चाहने वाले इस फ़िल्म को प्रायः स्मरण में नही रखते! कभी तो आ सपनो में आके जाने वाले और अरे कोई आओ ऱी सपनो में बुलाओ ऱी...जैसे गीत क्या भुलाये जा सकते है?
इन गीतों को सुनने के बाद यह स्थापित हो जाता है कि तथाकथित संगीतकार अपनी कर्कश तबले की थाप और समय की मांग के नाम पर अपनी कमजोरी अथवा मुहँ छिपाते फिरते है,आज का असभ्य संगीत,गंदे गीत,बच्चो का जीवन बिगाड़ने वाले गीत,कान फाडू संगीत,अजीब सी भद्दी आवाजे सुनकर भगवान् नटराज भी शायद संगीत युग से पलायन कर गए है।नीरस स्टेज प्रोग्राम जो चमचमाती रौशनी और गायक गायिकाओं का फैशन स्वरुप मुख्य होता जा रहा है।स्टेज प्रोग्राम महान शंकर जयकिशन के इसलिए प्यारे लगते है क्योंकि उसमे संगीत की आत्मा का निवास होता है और इसी कारण शंकरजयकिशन के स्टेज प्रोग्राम अपना प्रभाव शाली प्रभाव शंकरजयकिशन के संगीत के कारण ही स्थापित कर पाते है।SJMF अहमदाबाद ने महान शंकरजयकिशन के 25 सफलतम कार्यक्रम आयोजित कर शंकरजयकिशन को वास्तविक श्रद्धांजलि दी है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।में भी म्यूजिक नाईट में जाता था पर दम घोंटू संगीत व निम्नस्तरीय गीतों को सुनने में एक अजीब सी घुटन व एक बैचैनी सी महसूस करता था। उटपटांग गानो को सुनने को मन ही नहीं करता ..कोई बिंदिया चमकाता है या वादा तेरा वादा या देखते रहियो जैसे चालु गीत स्टेज पर गाये जाते थे तो विस्मय होता था कि क्या यह लोग हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम काल से परिचित नही है?किन्तु महान शंकरजयकिशन के गीत एक ठंडी बयार होते है।SJMF के लगातार 4 प्रोग्राम क्रमश 22,23,24 एवं 25 में जयपुर से अहमदाबाद इसी कारण अटेंड करने के लिए गया था कि शायद शंकरजयकिशन के गीतों की उच्चतम प्रस्तुति शायद मुझे देखने को मिल जाय ,सुनने को मिल जाय।में अत्यन्त भाग्यशाली रहा,यह सभी कार्यक्रम मील का पत्थर थे,शायद ही महान शंकरजयकिशन पर ऐसे सफल कार्यक्रम कही और आयोजित हुए हो!में इस भागीरथी प्रयास के लिए SJMF के संस्थापक Shree Snehal patel तथा Shree Chirag patel का अत्यंत आभारी हूँ तथा उन्हें बधाई देता हूँ।
काश वो संगीत का स्वर्णिम युग लौट आये जब संगीतकार रचनात्मक मौलिक धुनों की स्पर्धा करते थे, एक दूसरे की इज्जत करते थे, आज तो टांग खिंचाई का काम करते है।इसीलये में लिखता आया हूँ कि 1971 मे हिंदी फिल्म संगीत की हत्या हो गयी और गुणी संगीतकारो को अलग थलग कर दिया गया वो तो शंकर जी ही एक मात्र योद्धा थे जिन्होंने अंतिम दम तक उत्तम संगीत के लिए अपना जीवन लगा दिया। उनहाने फिल्मी संगीत प्रदूषण को दूर करने के अथक परिश्रम किये,किन्तु अकेला महाराणा प्रताप मुगलों की विशाल सेना को कैसे परास्त करता! उस पर विडम्बना यह कि अपने ही मानसिंह बन गए थे। खैर में अब पुनः गीत पर वापसी करता हूँ। जब परिस्थतियां हमारे अनुकूल नहीं होती तो हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगता एक बेबसी का आलम उतपन्न हो जाता है।परिन्दे समूह मे उड़ते है तो कितने प्रसन्न होते है?दो परिन्दे भी साथ साथ मस्ती से उड़ते है,किन्तु एकल पक्षी व्याकुलता में चिल्लाते हुए उड़ता है किंतु जो पिंजरे में कैद है उसका दर्द कोई भी नहीं जानता? उदास,नीरव जीवन?जीने की चाह ही मर जाती है,दो तीन फीट जितने स्थान में उसकी सीमा तय कर दी जाती है,अनंत आकाश की और ताकता पिंजरे का पंछी हर समय व्याकुल बना रहता है? व्यथा से भरी नारी चंद्रमा से कह रही है.... चन्द्रमा मद भरा क्यों झूमे है बादर में वो ख़ुशी अब कहाँ मुझ विरहन के घर मे.. एक पीड़ा नारी की शैलेन्द्र के शब्दों में अभिव्यक्त हो रही है। मद भरा चंद्रमा आकाश में झूम रहा है, पर उस नारी के लिये निरर्थक, जिसके घर में खुशियों का अकाल है.कोई रूठा जो है? जब से बलम रूठे है,उसके भाग ही रूठ गए,दिल को रोग लग गया है जब से रूठे बलम हमारे रूठे तबसे भाग हमारे मच गया रोग जिगर में चन्द्रमा...! जब सब कुछ सामान्य होता है तभी यह पर्वत,आसमान,पहाड़,नदियाँ,चन्द्रमा ,सितारे,सूरज,प्राकृतिक सौंदर्य सब अच्छे लगते है,परिवारों में भी यही होता है ढेरो खाद्य सामग्री डायनिंग टेबल पर सजी होती है पर यदि पारिवारिक विवाद हो,विषाद हो,नाराजगी हो,असफलता हो तो यह खाद्य सामग्री जहर समान लगती है किंतु यदि जीवन में सच्ची मस्ती हो तो पत्थरो पर बैठकर भी सुखी रोटी प्याज और लहसुन की चटनी के साथ भी जायकेदार और अच्छी लगती है जीवन और जिंदगी सुख का अहसास कराते है। लतामंगेशकर की बेहतरीन आवाज,शैलेन्द्र के अर्थ भरे पीड़ायुक्त शब्द और शंकर जयकिशन का कर्ण प्रिय संगीत इस गीत को चार चांद लगाते है, यह एक अत्यंत नायाब गीत है जिसको सुनने का एक अलग ही आनंद है।हमारा दुर्भाग्य रहा कि शंकरजयकिशन की कई रचनाओं को पर्दे पर साकार होने का अवसर ही नही मिला,जबकि यह अत्यंत कर्ण प्रिय रचनाएं थी,चंद्रमा मदभरा क्यो झूमे।बादर में..को फ़िल्म में निर्माता निर्देशक ने प्रस्तुत ही नही होने दिया जबकि यह गीत अत्यन्त प्रिय मेलोडी गीत था।इसी प्रकार शारदा का खूबसूरत गीत जो फ़िल्म गुमनाम का था----- आएगा कौन यहाँ किसको सदाये देता है दिल अपना है कौन यहाँ ...!! को भी फ़िल्म में स्थान नही मिला।ऐसी ही गलती फ़िल्म निर्माता,निर्देशक कनक मिश्रा भी करने जा रहे थे!जैसा की सूत्र बताते है कि वह फ़िल्म नैना से शारदा का गाया गीत "अलबेले सनम तू लाया है कहाँ"को फ़िल्म में रखने के पक्षधर नही थे किंतु शंकर जी के दृढ़ विश्वास के कारण इस गीत को फ़िल्म में रखना पड़ा जो कि फ़िल्म नैना का विशेष आकर्षण बना। शंकरजयकिशन का नाम करोड़ो भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए अमृत का वह अगाध स्रोत है,जो क्षणभर में महिमामय कर्ण प्रिय संगीत रस से तन मन को आप्लावित कर देता है। पटरानी फ़िल्म की याद भी केवल शंकरजयकिशन के श्रवणीय मधुर संगीत के कारण आती है,जिसके सभी गीत अत्यन्त लोकप्रिय हुए और जिस गीत " चंद्रमा मद भरा क्यो झूमे बादर में" को फ़िल्म में नही रखा गया था वही सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ ओर यज़ भी इस गीत की मांग रहती है। इस गीत को सुनने के बाद शंकरजयकिशन के बाद आये तथाकथित संगीतकारो की लुहारोवाली तबले की थाप तथा समय की मांग के नाम पर अपनी कमजोरी छिपाने की दुर्बलता का पता चल जाता है।इन्ही संगीतकारो के कारण हिंदी फिल्म संगीत का पतन हो गया।शंकरजयकिशन की शास्त्रीय रागों पर आधारितं धुनों में फ़िल्म पटरानी के "चंद्रमा मद भरा" गीत की धुन अत्यन्त सुंदर है।चातक को वर्षा के लिये,चकोर को चंद्रमा के लिए,सीपो को स्वाति बूंदों के लिए मौसम की राह देखनी पड़ती है किन्तु संगीत रसको को शंकरजयकिशन की धुनों रूपी सुधा के लिए कभी तरसना नही पडा, वह तो निरंतर संगीत की अमृत वर्षा करते रहे,तभी तो आज उनके करोड़ो प्रशंसक है जो सिर्फ शंकरजयकिशन के संगीत को ही पसंद करते है।फ़िल्म पटरानी का यह गीत कालजयी है,एक बार ध्यान से सुनिए आप निसंदेह मेरी बात का समर्थन करेंगे! Shyam Shanker Sharma Jaipur,Rajasthan
About Chandrama Madbharaa from film Patrani
By
Dr. Satyavir Yadav
#Sarod - the musical instrument, has rarely been used liberally in the compositions of hindi film songs. Sitar has always outplayed every other stringed instrument incl. Sarod. Wherever, Sarod has been used - the decision has been bold but beautiful. Also SJ were the bold & beautiful HFM composers. What a beautiful example of how a full song of 2 different interludes can be masterly composed with the predominant use of a single musical instrument ( Sarod ) !!. Shankar Jaikishan were the kings of this genre of compositions in HFM. This song is an absolute paradise of an example of such a composition with the liberal & extensive use of SAROD only. The other instruments used as fillers are tiny pieces of santoor/jaltarang, violin, & castanets/crackers. The limit of Latabai's notes in the last line of each antra is SKY HIGH & then immediately she scales down to the basal notes with such an amazing elegance and ease .... aaha ... this is ecstatic to listen to. This is ''Shivranjani'' at its best. Some have wrongly presumed that the magnificent play of Sarod in this song was by Amzad Ali Khan. He was just 10 yrs old when this number was composed in 1955-56. In fact the Sarod here was played by the then SJ's astt. ''Lalubhai Naik''.
CHORUS’ SONGS by SHANKAR JAIKISHAN with NO LEAD SINGER
Edited Post
by
Mukund Marulkar
Friends…SHANKARJAIKISHAN COMPOSED SOME ‘CHORUS’ SONGS IN WHICH NO MAIN SINGER IS ADOPTED FOR HIS/HER VOICE IN IT. THERE ARE EIGHT SONGS I OBSERVED.
1)# GAIR FILMI GEET-#aarohi tv programme...HAMSE KOEE PYAAR KARO JEE KAMSE KAM EK BAAR KARO JEE…SHARDA(as a lyric here)
2)#AAH 1953-MAIYAA YASHODAA JEE TOHAAR KANHAIYAA KARE ZULAM BADEE ZOR…TRADITIONAL SONG.
3)#BASANT_BAHAR 1956-GAAO REE BASANT BAHAAR –TRADITIONAL SONG.
4)#PATRANI 1956-DULHAN GOREE GHOONGHAT MEIN MUSKAAYE,DEKHO JEE KAHEEN UNSE BHEE SHARMAAYE…SHAILENDRA.
5)#AMRAPALI 1966-NAACHO GAAO NAACHO DHOOM MACHAAO NAACHO AAYAA MANGAL TYOHAAR LEKE KHUSHEEYAAN HAZAAR…SHAILENDRA.
6)#AMRAPALI 1966-NAMAAMEESHAMEESHAAN…..PRARATHANA…TRADITIONAL SONG.
7)#MERA_NAAM_JOKER 1970-I COME FROM ALABUM WITH THE BANJO ON MY KNEE…ENGLISH SONG.
8)#NAINA 1973-AE THAIYAA JHULANEE HAI RAANEE HO RAAMAA….TRADITIONAL SONG.