Many Happy Returns Of The Day ...Happy Birthday Vaijayantimala ..!
By
Sudhakar Shahane
लेख टंडन साहब के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'आम्रपाली' (१९६६), आचार्य चतुरसेन शास्री (१८९१-१९६०) द्वारा लिखित 'वैशाली की नगरवधू' नामक ऐतिहासिक उपन्यास पर आधारित थी, जिसकी कथा और कालावधी इसवी सन पूर्व ५०० साल के आसपास का था, तब लिच्छवी और मगध के अलावा अन्य साम्राज्य थे ... इस फ़िल्म में एस जे को शास्त्रीय संगीत पर आधारित रचनाएं, धुनें बनाने का सुनहरा अवसर 'बसंत बहार', 'राजहठ' के बाद मिला था ...और एस जे ने भी उस कालखंड और उस दौर के वाद्यों का बहुत अभ्यास और परिश्रम करके उस अनुरूप सभी गीतों की धुनें बनाई थी !
मगध सम्राट 'अजातशत्रु' (सुनील दत्त) वैशाली पर ससैन्य आक्रमण करता हैं, वोह युद्ध जीतता तो नहीं पर खुद जख्मी होकर बेहोश होता हैं ...होश आने पर वोह एक वैशाली के एक सैनिक के कपडे पहनकर भेस बदल लेता हैं, उसकी मुलाकात 'आम्रपाली' (वैजयंतीमाला) से होती हैं, स्वागतोसत्व के दर्मियां वोह आम्रपाली की जान बचाता हैं, जो वैशाली की नगरवधू हैं, और राजनर्तकी भी हैं, उसे वैशाली का एक बहादुर सैनिक समझती हैं और अजातशत्रु भी भविष्य में वैशाली राज्य को जीतने की मंशा से वही वैशाली नगर में रहने का फैसला करता हैं ... कुछ ही दिनों में आम्रपाली उससे प्यार करने लगती हैं, और अजातशत्रु भी उससे प्यार करने लगता हैं...एक रात वैशाली के राजदरबार में आम्रपाली का गायन और नृत्य का आयोजन किया गया हैं, वैशाली के सम्राट (बिपीन गुप्ता), उनके साथ वैशाली की सम्राज्ञी (रुबी मायर्स), कुलपती महानाम (गजानन जागिरदार), आदि सभी मान्यवर राजदरबार में बैठे हैं, उन्हे आम्रपाली के गायन और नर्तन का इंतजार हैं ... पर आम्रपाली इंतजार कर रही है, उसका जिसे वो दिल दे बैठी हैं, उसीके खयालों में खोयी हैं ... इस सिचुएशन पर, हसरत साहब का लिखा, यह राग 'भूपाली' पर आधारित गीत ...
Prelude की शुरुआत पखवाज वादन से होती हैं ... फिर सितार की झंकार ... फ़िर भी आम्रपाली खोयी खोयी खडी हैं, उसकी सखी (माधवी) उसे सचेत करती हैं ...और लता की मधुर आवाज में और रूपगर्विता वैजयंतीमाला का सहज सुंदर अभिनय और नृत्य से गीत शुरू होता हैं ... मुखडा गाते उसके चेहरे के भाव यह दर्शाते हैं की वोह उसके प्रीतम में खयालों में खोयी खोयी सी हैं ...दूसरी बार मुखडा गाते गाते वोह नाचना शुरू करती हैं ... मुखडे की पहली और दूसरी पंक्ती के बाद लता के आलाप का कोई तोड नहीं
नील गगन की छाँव में दिन रैन गले से मिलते हैं ..आssssआsssआssआsआ दिल पंछी बन उड़ जाता है, हम खोये खोये रहते हैं ..आssssआsssआssआsआ
Interludes में सितार, पखवाज, ढोलक वादन अप्रतिम साथ में वैजयंती जिस नृत्यकला को पेश करती हैं, वोह बेमिसाल हैं ... अब उसका प्रीतम भी राजदरबार की ओर आ रहा हैं ...पहले अंतरे में लता की आवाज़ उपर की पट्टी में जाती हुई ...'जब फूल कोई मुस्काता हैं', इस के बाद 'प्रीतम की सुगंध आ जाती हैं' पर नीचे आती हुई ...इसी प्रकार 'नस नस में भंवर सा चलता है', 'उपर की पट्टी फिर मदमाती जलन कलपाती हैं'पर सामान्य नीचला स्वर ... पूरा अंतरा ही लता ने गज़ब का गाया है ...हर मौज में हम तो बहते हैं के बाद लंबा आलाप ...
जब फूल कोई मुस्काता है, प्रीतम की सुगंध आ जाती है नस नस में भँवर सा चलता है, मदमाती जलन कलपाती है यादों की नदी घिर आती है, हर मौज में हम तो बहते हैं
फिर Interlude में सितार, ढोलक पखवाज का प्रयोग ... पहले अंतरे की तरह दूसरे अंतरे में भी उन्ही उंची और नीचली पट्टी में लता की लहराती आवाज़ का कोई सानी नहीं .. आलाप
कहता है समय का उजीयारा एक चन्द्र भी आनेवाला है इन ज्योत की प्यासी अखियन को अंखियों से पिलानेवाला है जब पात हवा से बजते हैं, हम चौंक के राहें तकते हैं
गीत ख़त्म होता है और अजातशत्रु बाहर पहरा देते सैनिकों से लड़ता हुआ राजदरबार के द्वार पर आकर खडा होता हैं ... आनंदविभोर आम्रपाली उसका स्वागत करने पहुंचती हैं ... फिर समय का ध्यान रखते हुए अजातशत्रु का परिचय वैशाली सम्राट से करवाती हैं की, 'यही वोह बहादुर वीर हैं, जिसने उसकी जान बचाई थी' ... अंदर आकर अजातशत्रु अपनी तलवार सम्राट के चरणों मे रख देता हैं ... योग्य सन्मान देते हुए सम्राट उसे अपने बाजू में बिठाते हैं ...अब
Postlude व्हिडिओ क्लीप में ५.१९ से सितार वादन से शुरू...फ़िर पखवाज, ढोलक के ताल पर आम्रपाली के थिरकते कदम ...गायन के बाद अपनी नृत्यकला को शानदार तरीके से पेश करती हुई आम्रपाली, 'प्रीतम' और राजदरबार का दिल जीत लेती हैं ...!
पूरे गीत में हसरत साहब ने आम्रपाली के मनकी तड़प, प्रीतम की याद में खोया उसका दिल,उसके जज़बात, लफ़्जों द्वारा प्रकट किए हैं ...तो एस जे ने बहुत कम वाद्यों का प्रयोग करके उसे राग 'भूपाली' में रचा हैं ...फ़िल्म के अन्य गीत भी रागदारी पर आधारित थे ...पूरी फ़िल्म आम्रपाली के इर्दगिर्द घूमती हैं ... कथा नायिका गायिका और राजनर्तकी हैं, तो यह भूमिका वैजयंतीमाला के अलावा और कोई अभिनेत्री बेहतर कर ही नही सकती थी ... पूरी लगन से वैजयंती ने यह किरदार निभाया ... फ़िल्म औसतन चली, पर एस जे की अन्य गीतों की धुनें और संगीत यादगार था ...'एस जे एस एच' को सलाम !
https://youtu.be/55LRrp3XNA4









