#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीतामेंप्रमाणहै
शास्त्रों के विरुद्ध साधना?
मार्कंडेय पुराण, पेज 250-251 में रुचि ऋषि ने पितरों से स्पष्ट कहा कि श्राद्ध कर्म वेदों में अज्ञान का मार्ग बताया गया है। श्राद्ध-पिंडदान वेदों के अनुसार मूर्खों का कार्य है।
मृत्यु के उपरांत तेरहवीं, छमाही, बरसी, पितृ पूजा, श्राद्ध कर्म आदि कुरीतियाँ जो लोगो के ऊपर बोझ बनी हुई है उन्हें सद्ग्रंथों का सत्यज्ञान देकर समाप्त कर रहे है।
Sant Rampal Ji Maharaj








