सबके अपने राम, सबके अपने सच... 🦂
क्या कभी किसी से Logical बात करते-करते अचानक उसने विषय छोड़कर आप पर ही Personal Attack कर दिया?
Psychology में इसे Naive Realism और Gaslighting कहते हैं—जहाँ हर इंसान अपने ईगो और असुरक्षा के चश्मे से दुनिया देखकर खुद को 100% सही मानता है।
नैन खुले पर देख न पाएँ, ज्ञान मिले पर समझ न आए।
कैसी कुंठा घेर चुकी है, मानव को मानव मान न पाए...
ऐसे कुतर्की लोगों और Gaslighters को हैंडल करने के 5 अचूक नियम जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
मानवीय अहंकार, नाइव रियलिज्म और सबके अपने सच पर विश्लेषण। जानिए ईगो के शोर में सत्य क्यों खो जाता है। पढ़ें पृथ्वी की यह खास विचारशील कविता।









