मन व्यथित है, दुःखी है, लेकिन हारा हुआ नहीं है। राजघाट आया हूँ। एक दिन के उपवास पर हूँ। एक दिन की भूख से आसिफा की उस भूख का शायद अंदाज़ा लगा सकूं, जो दुर्दांत पीड़ा के साथ 8 दिन तक उस बच्ची ने झेली थी, या शायद स्वाति की इस न्याय की पुकार में अपनी आवाज़ मिलाने सा महसूस कर सकूं। याद रहे उसी भूख, उसी पीड़ा के लिए इंसाफ मांगने राजघाट पर जान की बाजी लगाने वाली स्वाति के आमरण अनशन का आठवां दिन है आज। स्वाति पिछले 7 दिन से भूखी राजघाट पर बैठी है। शरीर जर्जर हो चुका है, लेकिन हौसला अभी भी जस का तस है। स्वाति क्या मांग रही है? आसिफा और उसी जैसी बच्चियों के लिए इंसाफ की आस लगाए प्रधानमंत्री की तरफ देख रही है। ये किसी का निजी मुद्दा नहीं है। न ही ये महिलाओं की कोई निजी मांग है, और न ही पुरुषों की। मेरा मानना है कि औरतों के हक, उनकी सुरक्षा के लिए सबसे पहली कतार में, सबसे बुलंद आवाज़ के साथ, पुरुषों को खड़ा होना चाहिये। पुरुष जो कि माँ, बहन, बेटी, पत्नी, साथी, संगी जैसे कई रिश्तों के साथ अपना पूरा जीवन जीता है, कैसे महिलाओं की ख़ैरियत, उनकी सुरक्षा से उसका वास्ता नहीं है? पूरा-पूरा वास्ता है। जानवर बन रहे इंसान के खिलाफ वसजब पूरा समाज एकजुट होकर लड़ेगा, तभी मानवता को बचाया जा सकता है। समस्या सबकी है, पीड़ा सबकी है, तो समाधान भी हम सबको ढूंढना होगा। आप भी आइये और हमारी माँ, बहन, बेटियों के जीवन की सलामती के लिए प्रधानमंत्री से गुहार लगाइए कि बलात्कारियों को जल्द से जल्द और सख़्त से सख़्त सज़ा (फांसी की सज़ा) का प्रावधान हो, ताकि कोई बच्ची फिर निर्भया, आसिफा जैसी पीड़ा न झेले। आज मीडिया के हवाले से यह पता चला की इस संघर्ष और अनशन को एक प्रारंभिक जीत मिली है। भाजपा सरकार स्वाति की पहली और सबसे बड़ी माँग - बच्चों के बलात्कारियों को फाँसी का प्रावधान - को मानने को तैयार हुई है। स्वाति की तबियत, कमज़ोर होता शरीर देखकर हमने उनसे गुज़ारिश की है इस जीत पर अपना आमरण अनशन तोड़ें और इस अध्यादेश के लाने से लेकर, लागू करवाने तक के लिए कमर कसें, लेकिन स्वाति अभी अनशन तोड़ने के लिए तैयार नहीं। #RapeRoko #StopRape