India China Face-Off : चीन ने रिहा किए भारत के 10 भारतीय सैनिक
नई दिल्ली : भारत और चीन के सैनिकों के बीच सोमवार को गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प में देश के 20 जवान शहीद हो गए, जिसके बाद से देश में गुस्से का माहौल है और चीन को कड़ा जवाब देने की आवाज़ उठ रही है, चीन विवाद को लेकर चर्चा करने के लिए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें राजनीतिक दलों के अध्यक्ष शामिल होंगे |
चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने इंडियन आर्मी के उन 10 सैनिकों को रिहा कर दिया जिन्हें 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद उसने पकड़ लिया था। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इन सैनिकों को गुरुवार रात रिहा किया गया है। सोमवार को गलवान घाटी (पेट्रोलिंग प्वाइंट 14) पर हुए हिंसक टकराव में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए हैं। जबकि कुछ सैनिकों को चीन ने बंदी बना लिया था।
इससे पहले भारतीय सेना ने गुरुवार को उन मीडिया खबरों को खारिज किया जिनमें दावा किया गया है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में तीन दिन पहले चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़पों के बाद उसके कई सैनिक लापता है | सेना ने एक बयान में कहा, ‘यह स्पष्ट किया गया है कि कार्रवाई में कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं हैं |
इस तरह की खबरें थीं कि गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीनी सेना ने भारतीय सेना के कुछ सैनिकों को बंदी बना लिया है | इस झड़प में 20 भारतीय सैन्यकर्मी शहीद हो गये थे | चीन ने हताहतों की संख्या अभी तक जारी नहीं की है | विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने भी एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि सोमवार को हुई झड़प के बाद से कोई भारतीय सैनिक लापता नहीं हुआ है |
76 जवानों की हालत ठीक,15 दिन में जॉइन करेंगे ड्यूटी
वहीं समाचार एजेंसी के अनुसार भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि गुरुवार दोपहर तक किसी भी जवान की हालत गंभीर नहीं है | इसके साथ ही 58 जवानों को मामूली चोटें आई हैं | जानकारी दी कि फिलहाल सभी जवानों की हालत खतरे से बाहर है | 18 जवानों को लेह के अस्पताल में भर्ती कराया गया है | ये सभी जवान 15 दिन में ड्यूटी जॉइन करने के लिए पहुंच सकते हैं | वहीं, 58 जवान जिन्हें मामूली चोटें आई हैं वह एक हफ्ते के भीतर वापस मोर्चे पर पहुंच सकते हैं |
गौरतलब है कि गत पांच और छह मई को हिंसक झड़प में लगभग 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के शामिल होने के बाद क्षेत्र में स्थिति बिगड़ गई थी | पैंगोंग सो में हुई घटना के बाद नौ मई को उत्तरी सिक्किम में भी इसी तरह की घटना हुई थी | बता दें साल 1962 के चीन-भारत युद्ध के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब भारतीय सैनिकों को चीनी पक्ष ने बंधक बना लिया था |
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