दो हज़ार किलोमीटर की यात्रा कर बालक को पहुँचाया घर |
अलीगढ़ 10 मई : उड़ान सोसाइटी द्वारा संचालित चाइल्ड लाइन की टीम ने लॉक डाउन के चलते अपने परिजनों से नहीं मिल पा रहे बालक को प्रशासन के सहयोग से दो हज़ार किलोमीटर की यात्रा कर उसके घर छपरा (बिहार) पहुँचाया | चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि इसी वर्ष पांच मार्च को बरेली पैसेंजर में बैठे एक सत्रह वर्षीय बालक ने फ़ोन करके चाइल्ड लाइन का सहयोग माँगा था | जिसे उसी दिन जीआरपी के माध्यम से चाइल्ड लाइन ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया | बालक के अनुसार वह छ: माह पूर्व घर से निकल आया था और तभी से मुंबई, हरिद्वार सहित कई स्थानों पर घूम रहा था | बालक ने अपना पता गाँव तुर्की पानापुर पोस्ट रसौली थाना पानापुर जनपद सारन (छपरा) बताया | उसने कहा कि वह अपने घर नहीं जाना चाहता क्योंकि वह परिजनों से कह कर निकला है कि जब तक कुछ बन नहीं जाता तब तक घर वापस नहीं आएगा | होली के उपरांत बालक के परिजनों से लगातार संपर्क किया जा रहा था | परिजनों के अनुसार वह कई बार घर से निकल चुका था जिसे वह देश से विभिन्न स्थानों से ला चुके थे | परिजनों और बालक दोनों की इसी जिद्द में कई दिन निकल गए और देश में लॉक डाउन लागू हो गया | जिसके बाद से ही वह अलीगढ़ में चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में रह रहा था | चाइल्ड लाइन की टीम के काफी समझाने के बाद जब परिजन बालक को लेने के लिए राज़ी हुए और बालक भी अपने घर जाने को तैयार हुआ तो लॉक डाउन के चलते परिजनों ने आने में असमर्थता व्यक्त कर दी | इधर दो माह तक चाइल्ड लाइन की टीम के लगातार उसकी काउंसिलिंग से बालक भी अपने परिजनों से मिलने को व्याकुल होने लगा | चार मई के बाद जब प्रशासन द्वारा अन्य राज्यों में जाने की अनुमति दी जाने लगी तो चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने जिला प्रोबेशन अधिकारी स्मिता सिंह के सहयोग से एसीएम-2 रंजीत सिंह के कार्यालय से वाहन पास निर्गत कराया | जिसके बाद बालक को टीम सदस्य नीलम सैनी एवं स्वयंसेवक राजू धीमान प्राइवेट वाहन से उसे छोड़ने के लिए गए | बाल कल्याण समिति अलीगढ़ की अध्यक्ष नीरा वार्ष्णेय, सदस्य मटरूमल व् साधना गुप्ता से आदेश कराकर जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय सारन में बालक अपने पिता की सुपुर्दगी में दिया गया | जहाँ आठ महीने बाद अपने जिगर के टुकड़े को देखकर पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा | चाइल्ड लाइन की समन्यवय शिरीन राजेंद्र का दोनों जिलों से समन्वय व् परिजनों से संपर्क करने में विशेष सहयोग रहा |
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