रोशनी : 38 नेत्रदान पखवाड़ा
काश- अँधेरी सी जिन्दगी में, थोड़ी सी रोशनी भरी राहे होती! काश मैं भी कुछ देख पाती. जब मेरे पास निगाहें होती । रोशनी क्यू करता है तू निगाहों का इंतजार, ले ले मेरी तरफ से एक उपहार ! मैं वो चला रख के पास, अब होगा तेरे सामने रंगो का संसार।
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