बीसवीं शताब्दी के सबसे मशहूर एवं महत्वपूर्ण उर्दू शायर अल्लामा इकबाल ने अपनी किताब बांग-ए-दरा& में गुरु नानक देव के शौर्य पर लिखा है, फिर उठी आखिर सदा तौहीद की पंजाब से, हिंद को एक मर्द-ए-कामिल ने जगाया ख्वाब से यहां इकबाल कहते हैं कि पंजाब की सरजमी से,नानक के रूप में, फिर एकेश्वरवाद की आवाज उठी है जिससे हिंदुस्तान की सोती हुई चेतना जागने लगी है। इन पंक्तियों से इक़बाल ने नानक जैसे कवि और गुरु के संदेश और महत्वता दोनों को दार्शनिकता से प्रतिबिंबित किया है।
















