कही कश्ती नहीं रुकती,नहीं साहिल बसेरा है। फ़कत कुछ ढूंढती आँखें,मगर कोहरा घनेरा है।। पलट कर देख ले ज़ालिम ज़रा एक बार फिर से। मोहब्बत के शहर में बेवफा, बस नाम तेरा है।। ©आनेह Like | Share | Comments | Subscribe | link below- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1694612533892218&id=1138166689536808











