जब कुत्ते ने बताया श्रीराम को मंदिर में चोरी करने का फल
निर्मल प्रभात काल में पूर्वाह्ण कालोचित संध्या-वन्दन आदि नित्यकर्म करके कमलनयन राजा श्रीराम राजधर्मों का पालन (प्रजाजनों के विवाद का निपटारा) करने के लिये वेदवेत्ता ब्राह्मणों, पुरोहित वसिष्ठ तथा कश्यप मुनि के साथ राजसभा में उपस्थित हो धर्म (न्याय) के आसन पर विराजमान हुए। वह सभा व्यवहार का ज्ञान रखने वाले मन्त्रियों, धर्मशास्त्रों का पाठ करने वाले विद्वानों, नीतिज्ञों, राजाओं तथा अन्य सभासदों से…









