लडकी...तुम सोचती बोहत हो!
लडकी तुम सोचती बोहत हो, उस जमाणे के बारे मे जो शायद गुमशुदा हैं बेगानो में, तुम्हारी किसींको परवाह नही चाहो तो गुम होकार देखलो कुछ पल पैमानो में.....
लडकी....तुम सोचती बोहत हो करती हो तुम दुनिया की परवाह, ज्यादा अपने से और अपनो से फिकर तूम्हे उनकी नजरो की, अपनी खुशीया और अपने सपनो से,
क्योंकि लडकी...तुम सोचती बोहत हो












